Results for Transformer

 transformer ki maintenance 

पावर ग्रीड और सब स्टेशन के अन्दर बड़े बड़े परिणामित्र लगें होते है। सब स्टेशन में सभी उपकरणों में ट्रांसफॉर्मर सबसे महंगा यन्त्र होता है इसलिए इसकी देखभाल करना बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है। आज हम इस लेख में transformer ki maintenance के बारे में ही जानेंगे।
ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत करने के काफी सारे शेड्यूल होते है जैसे घंटों के बेस पर मेंटिनेंस करना, रोजाना के बेस पर, महिने के बेस पर, तीन महीने के बेस पर, अर्ध वार्षिक बेसिस पर और वार्षिक बेसिस पर इन सभी शेड्यूल के बेसिक पर transformer ki maintenance की जाती है। नीचे इन सभी शेड्यूल के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करेंगे कि कैसे इन शेड्यूल में ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत की जाती है।

transformer ki maintenance


• घंटों के बेसिस पर (hourly basis)

पावर ग्रीड या सब स्टेशन के अन्दर जो ओपरेटर होते है वो हर एक घंटे बाद परिणामित्र की निम्न चीजों की देख रेख करते है और उन सभी अपने रजिस्टर में लिखते है। जैसे ट्रांसफॉर्मर की प्राइमरी साइड में कितना भार जुड़ा हुआ है और transformer की आउटपुट वोल्टेज को चैक करते है। तिसरी चीज इस शेड्यूल में तेल का तापमान चैक करते है।

इसे भी पढ़ें : Transformer kya hota hai in hindi

• रोजाना बेसिस पर (daily basis) 

इस शेड्यूल में सबसे पहले यह चैक करते है कि ट्रांसफॉर्मर टैंक से कहीं तेल तो नहीं निकल रहा है यदि टैंक से कहीं को तेल का रिसाव होता है तो इसे जल्दी ही ठीक किया जाता है। फिर इसमें परिणामित्र की काॅयल का ताप देखा जाता है कि वह नाॅर्मल है या नहीं। इसका पता ट्रांसफॉर्मर के मार्सिलिंग बाॅक्स में दो चीजों को देखने से पता चलता है। पहला है वाइंडिंग टेम्प्रेचर इंडिकेटर और दूसरा है ओयल टेम्प्रेचर इंडिकेटर इन दोनों इंडिकेटर की मदद से वाइंडिंग और तेल के तापमान पता चल जाता है। तिसरी चीज इस शेड्यूल में कंजर्वेटर टैंक में तेल का लेवल चैक किया जाता है और चौथी चीज बुसिंग में ओयल का स्तर चेक करते है फिर इसी के हिसाब से transformer ki maintenance की जाती है।

• महिने वार (monthly basis) 

इस शेड्यूल में सबसे पहले ट्रांसफॉर्मर की ब्रिदर को चैक करते है। ब्रिदर कंजर्वेटर टैंक से कनेक्ट होती है इसमें सबसे नीचे के हिस्से में तेल के लेवल को चैक किया जाता है। ब्रिदर के ऊपरी हिस्से में निले रंग का सिलिका जेल भरा होता है इसका काम तेल से नमी को निकालना होता है। जब इसका रंग गुलाबी हो जाता है तो ये खराब हो जाता है इसकी नमी को ऐब्जोर्ब करने की ताकत खतम हो जाती है। ब्रिदर के अन्दर फिर दुसरा सिलिका जेल डाला जाता है या इसको अधिक तापमान पर गर्म करके दोबारा से प्रयोग में लाया जा सकता है। दूसरी चीज इसमें बुकोल्ज रिले में ओयल के लेवल को चैक करते है।

• तीन महीने पर (three month basis) 

हर तीन महीने बाद ट्रांसफॉर्मर की बुसिंग को चैक करना होता है क्योंकि इनमें गंदगी धूल मिट्टी के कण बैठ जाते है जिसकी वजह से बुसिंग की विधुतरोधी ताकत कम हो जाती है और इनका ब्रेकडाउन होने का खतरा बढ़ जाता है इसलिए बुसिंग की हर तीन महीने बाद मरम्मत करना जरूरी होता है।
दूसरी चीज इस शेड्यूल में transformer oil की टेस्टिंग की जाती है जिसे ओयल ब्रेकडाउन वोल्टेज टेस्ट कहते हैं। और हर तीन महीने बाद जितने भी बड़े परिणामित्र होते है उनके अन्दर जो कूलिंग फैन लगें होते है जो मैन्यूवली और ओटोमेटिक दोनों तरिके से काम करते हैं। यह फैन transformer की वाइंडिंग को ठंडा करने का काम करते है इसलिए इनकी काम करने की पर्फोमेंस को भी चैक किया जाता है।

• अर्ध वार्षिक बेसिस पर (half yearly basis) 

हर छं महिने बाद ट्रांसफॉर्मर ओयल की सम्पूर्ण टेस्टिंग की जाती है जिसमें तेल में मोजूद अम्लता को चैक किया जाता है क्योंकि यदि तेल अधिक अम्लीय होगा तो तेल में जल जल्दु मील जाता है फिर इसमें तेल में मोजूद sludge content को देखते है क्योंकि यह ओयल को जल्दी ठण्डा नहीं होने देते है इसी प्रकार से और भी बहुत सी तेल की टेस्टिंग की जाती है।

• वार्षिक बेसिस पर (yearly basis)

transformer ki maintenance के इस शेड्यूल में ग्रीड या सब स्टेशन में जो ट्रांसफॉर्मर होते है उसकी पूरी तरह से मेंटिनेंस की जाती है। जिसके लिए सब स्टेशन को कुछ घंटों के लिए शड डाउन किया जाता है। इसमें बुकोल्ज रिले के मैकेनिकल फंक्शन को चैक किया जाता है देखा जाता है कि इसके ट्रिपिंग और अलार्म कोन्टैक्ट अच्छे से काम कर रहे है या नहीं। और इस शेड्यूल में परिणामित्र का मार्सिंग बाॅक्स और उसमें लगें इंडिकेटर को अच्छे से साफ किया जाता है और दखा जाता है कि ये सही से चल रहे है या नहीं चल रहे। और कूलिंग फैन को भी चैक किया जाता है कि वे हिल तो नहीं रहें या फिर ज्यादा आवाज तो नहीं कर रहे और ट्रांसफॉर्मर का इंसुलेशन प्रतिरोध को भी चैक किया जाता है और परिणामित्र अर्थिंग भी चैक की जाती है और सबसे बाद में यदि transformer की बाॅडी की सर्फेश खराब हो गई है या उसका पेंट खराब हो गया हो तो उसकी बाॅडी पर दौबारा से पेंट किया जाता है।

तो यही था transformer ki maintenance का पूरा लेखा जोखा जो आपको इस छोटी सी जानकारी में मैंने बताया है उम्मीद करता हूं कि आप सब को यह पोस्ट अच्छी लगी होंगी। आप की तरह और भी आपके ऐसे इलैक्ट्रिकल मित्र होंगे जिन्हें ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत के बारे में पता नहीं होगा तो आप इस पोस्ट को अपने उन मित्रो के साथ भी शेयर जरूर किजिए।
Er. Chand नवंबर 23, 2021
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Buchholz Relay क्या है

buchholz relay एक गैस के द्वारा शुरू होने वाला रिले है जो कि तेल डुबकी ट्रांसफॉर्मरों में लगाई जाती है। यह रिले transformer को हर तरह के फाल्ट से बचाने का काम करता है। यदि ट्रांसफॉर्मर में कोई छोटा फाल्ट आता है, तो buchholz relay घण्टी के द्वारा सूचित करता है और जब कोई गंभीर आन्तरिक दोष आ जाता है, तो यह रिले परिणामित्र को मेन सप्लाई से पृथक कर देता है। यह रिले परिणामित्र टैंक और कंजर्वेटर टैंक के बीच में लगाई जाती है इसका उपयोग 500 kvA से अधिक रेटिंग वाले तेल डूबकी transformer की प्रोटैक्शन के लिए किया जाता है। ब्कोल्ज रिले को pre fault relay और gas actuated रिले के नाम से भी जाना जाता है।

Buchholz relay की संरचना

buchholz रिले की बनावट कुछ ऐसी होती है, ये एक dome vessel की तरह दिखाई देती है जो कि मेन टैंक और कंजर्वेटर टैंक को जोड़ने वाले पाइप के बीच में लगाई जाती है। ब्कोल्ज रीलें को दो भागों में बांटा गया है जिसमें एक ऊपर का भाग होता है और एक निचला हिस्सा होता है।

ऊपरी हिस्सा इसमें एक मर्करी टाइप स्विच लगा होता है जो हिन्ज की तरह के फ्लैप पर लगा होता है ( यह स्विच जब ट्रांसफॉर्मर टैंक से तेल कंजर्वेटर में जाता है तो उसके रास्ते में लगा होता है। ) जब transformer में कोई मामूली दोष आता है तो यह अलारम सर्किट को बंद कर देता है।

निचला हिस्सा- यह भाग जब परिणामित्र में बहुत खतरनाक आंतरिक फाल्ट आता है, तो यह सर्किट ब्रेकर को ट्रिप कर देता है।

buchholz relay working in hindi (ब्कोल्ज रिले का कार्य सिद्धान्त)

ट्रांसफॉर्मर के अन्दर फाल्ट आने के कारण जो गर्मी या आर्क उत्पन्न होती है उसकी वजह से परिणिमित्र टैंक में उपस्थित तेल का विघटन होने लगता है। विघटन होने से जो उत्पाद बनता है उसमें सत्तर प्रतिशत से भी ज्यादा हाइड्रोजन होती है। हाइड्रोजन एक हल्की गैस होने के कारण ऊपर की ओर उड़ने लगती है और यह गैस कंजर्वेटर टैंक में जाने की कोशिश करती है और यह buchholz relay के ऊपरी हिस्से में फंस जाती है जिसके कारण ये हाइड्रोजन गैस रिले के अन्दर जाने लगती है। तेल का विघटन होने से तेल का स्तर कम होता जाता है और जो फ्लोट तेल के ऊपर तैर रहा होता है वो नीचे की ओर गिरने लगता है। ऐसा होने पर फ्लोट, जो मर्करी स्विच लगा होता है वह बंद हो जाता है और अलार्म बजने लगता है यह अलार्म परिपथ को बन्द कर देता है।
buchholz-relay-working-in-hindi
Buchholz Relay Working


जब परिणामित्र में गंभीर शाॅर्ट सर्किट फाल्ट आता है तब टैंक का दबाव बढ़ने लगता है और यह दबाव कंजर्वेटर की ओर बढ़ता है। जब तेल इस दबाव के कारण कंजर्वेटर टैंक की ओर जाता है तब यह ब्कोल्ज रिले से गुजरता है, जिससे रिले पर लगी पत्तियां गैस के दबाव से दबने लगती है और इसके द्वारा दूसरा स्विच बंद हो जाता है, जिससे परिपथ वियोजक ट्रिप हो जाता है। इसके बाद जब तक यह फाल्ट ठीक नहीं होता है ट्रांसफॉर्मर को काम में नहीं लिया जाता है।

ब्कोल्ज रिले के लाभ

• buchholz relay transformer को सुरक्षित रखने का सबसे अच्छा और सरल माध्यम है।
• इस रिले के द्वारा छोटे फिल्ट का बहुत ही जल्दी पता लगा लिया जाता है।

Buchholz relay की हानियां

• यह रिले केवल तेल में डूबे हुए transformer जिनके साथ कंजर्वेटर टैंक लगा होता है, केवल उन्हीं की सुरक्षा के लिए काम आती है।
• यह केवल परिणामित्र में जहां तक तेल का स्तर होता है, वही तक दोष का पता लगा सकती है। इसलिए तारों को अलग से सुरक्षा प्रदान करनी पड़ती है।
• buchholz relay 500 kvA रेटिंग से ऊपर वाले परिणामित्र के लिए ही प्रयोग होती है। इससे कम रेटिंग वाले transformer के लिए इस रिले का उपयोग नहीं किया जाता है।

ब्कोल्ज रिले की सीमाएं

• मर्करी स्विच की सेटिंग अधिक संवेदनशील नहीं होनी चाहिए, वरना यह रिले किसी कंपन, यांत्रिक झटके या पक्षियों के बैठने से रिले का परिचालन रूक सकता है।
• यह रिले धीमी गति पर कार्य करता है। इसकि न्यूनतम परिचालन समय 0.1 सेकेण्ड और औसत परिचालन समय 0.2 सेकेण्ड है।

Er. Chand नवंबर 05, 2021
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  थ्री फेज ट्रांसफार्मर क्या होता है


थ्री फेज ट्रांसफॉर्मर कई प्रकार के होते है इन्हें कनेक्शन के आधार पर कई भागों में बांटा गया है जैसे थ्री फेज स्टार स्टार कनेक्शन ट्रांसफॉर्मर, स्टार डेल्टा ट्रांसफॉर्मर, डेल्टा स्टार ट्रांसफॉर्मर, डेल्टा डेल्टा ट्रांसफॉर्मर इस प्रकार थ्री फेज ट्रांसफॉर्मर कनेक्शन के आधार पर चार भागों में बांटा गया है आज इन्ही चार प्रकार के थ्री फेज ट्रांसफार्मर इन हिंदी के बारे में हम नीचे बिस्तार से पढ़ेंगे। सबसे पहले हम स्टार स्टार कनेक्शन ट्रांसफॉर्मर के बारे में बात करेंगे।

Star star connection Transformer

इस कनेक्शन में transformer की प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों वाइंडिंग star में जुड़ी होती है । इस कनेक्शन का उपयोग उन स्थानों पर करतें हैं जहां high voltage rating की आवश्यकता होती है क्योंकि प्रति फेज वोल्टेज का मान VL/√3 होता है।

यह कनेक्शन small rating, high voltage के लिए उपयोग किये जाते हैं । 
Star star connection kya hota hai



              Voltage ratio

             Current ratio

चूंकि एक फेज के एक्रोस वोल्टेज का मान
 होता हैं ।
इसलिए वाइंडिंग के लिए आवश्यक इंसुलेशन का मान delta delta के कंपेरिजन में काफी कम होता हैं ।

डेल्टा डेल्टा कनैक्शन ट्रांसफॉर्मर

इस कनैक्शन में ट्रांसफॉर्मर की दोनों वाइंडिंग प्राइमरी और सेकेंडरी डेल्टा कनैक्शन में जुड़ी होती है। इस डेल्टा डेल्टा कनैक्शन का प्रयोग हम वहां करते है जिस ट्रांसफॉर्मर में अधिक धारा और कम वोल्टेज की आवश्यकता होती है। इस कनैक्शन में यदि किसी एक फेज में फाल्ट आ जाये तो फाल्ट आने के बाद भी इस कनैक्शन में सप्लाई चालू रहती है। क्योंकि इस समय ट्रांसफॉर्मर ओपन डेल्टख के रूप में काम करता है। यही इस डेल्टा डेल्टा कनैक्शन की खास बात है कि एक फेज में फाल्ट आने के बाद भी सप्लाई चालू रहती है।

स्टार डेल्टा कनैक्शन ट्रांसफॉर्मर 

स्टार डेल्टा कनैक्शन का प्रयोग उन स्थानों पर करतें है जहां पर हमे वोल्टेज को कम करना होता है। इस कनैक्शन में हम प्राइमरी वाइंडिंग को स्टार में कनेक्ट करते है और सेकेंडरी वाइंडिंग को डेल्टा में कनैक्ट किया जाता है। इस स्टार डेल्टा कनैक्शन का प्रयोग हम ट्रांसमिशन लाइन के एंड में करते है। इस कनैक्शन में हमे प्राइमरी और सेकेंडरी वाइंडिंग के बीच 30 डिग्री का फेज डिफरेंस प्राप्त होता है। 

डेल्टा स्टार कनैक्शन ट्रांसफॉर्मर 

डेल्टा स्टार कनैक्शन का प्रयोग हम उन स्थानों पर करतें है जहां पर हमे वोल्टेज को बढाना होता है। इस कनैक्शन में ट्रांसफॉर्मर की प्राइमरी वाइंडिंग को डेल्टा में कनैक्ट किया जाता है और ट्रांसफॉर्मर की सेकेंडरी वाइंडिंग को स्टार में कनैक्ट किया जाता है। इस डेल्टा स्टार कनैक्शन का प्रयोग ट्रांसमिशन लाइन के स्टार्टिगं में किया जाता है। 

V-V कनैक्शन ट्रांसफॉर्मर 

V-V कनैक्शन को ओपन डेल्टा कनैक्शन भी कहते है। यदि डेल्टा डेल्टा कनैक्शन में कोई एक फेज खराब हो जाये या ओपन हो जाये तब भी सप्लाई दो फेज के द्वारा चालू रहती है। तो इसी कनैक्शन को हम v-v कनैक्शन कहते है। 
यदि हम 3 सिंगल फेज ट्रांसफॉर्मर को डेल्टा में जुड़ा हुआ मानते है और उनमें से किसी एक ट्रांसफॉर्मर की वाइंडिंग को हटा दें। तब भी सप्लाई परिपथ पूरा होने के कारण चालू रहती है। लेकिन इस कनैक्शन में परिपथ में कुछ बदलाव आ जाते है।
हर एक फेज में बहने वाली धारा, फेज धारा नहीं रहती है वह लाइन धारा हो जाती है। यानि के धारा √3 गुना बढ़ जाती है।
ओर ट्रांसफॉर्मर बैंक की रेटिंग कम हो जाती है। वह 57.7 प्रतिशत रह जाती है।

स्कोट कनैक्शन (Scott Connection) 

इस कनैक्शन में दो अलग-अलग ट्रांसफॉर्मर का प्रयोग किया जाता है। जिन्हें हम मेन ट्रांसफॉर्मर और टीज़र (teasure) ट्रांसफॉर्मर कहते है। टीजर ट्रांसफॉर्मर को हम मेन ट्रांसफॉर्मर के दोनों वाइंडिंग के बीच में जोड़ा जाता है। टीजर ट्रांसफॉर्मर की वाइंडिंग में टर्न की संख्या मेन ट्रांसफॉर्मर की वाइंडिंग के टोटल टर्न की संख्या के √3/2 गुना होती है।

यहां पर हमने थ्री फेज ट्रांसफॉर्मर के कई प्रकार के बारे में जाना है आप सभी को अच्छे से समझ में भी आ गया होगा। दोस्तों अगर आपके मन में अभी भी कोइ थ्री फेज ट्रांसफार्मर इन हिंदी से जुड़ा कोई सवाल है तो आप हमें कमेंट करके बता सकते है हम आपके सवाल का हल जरूर निकालेंगे। 

Er. Chand जुलाई 06, 2021
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आटो ट्रांसफॉर्मर क्या होता है

इस ट्रांसफॉर्मर में एक वाइंडिंग का प्रयोग किया जाता है। इसलिए इसे एक वाइंडिंग ट्रांसफॉर्मर भी कहते हैं जिसमें केवल एक ही वाइंडिंग होती है । जो हाई वोल्टेज और लाॅ वोल्टेज की तरह काम करती है इस ट्रांसफॉर्मर का उपयोग उन स्थानों पर किया जाता है जहां ट्रांसफॉर्मेशन रेशों ( k ) का मान एक (1) के बहुत नजदीक होती है क्योंकि जब k का मान 1 के बहुत नजदीक होगा तब इस ट्रांसफॉर्मर में काॅपर की आवश्यकता डबल वाइंडिंग ट्रांसफॉर्मर की तुलना में बहुत कम होगी । इसलिए इस ट्रांसफॉर्मर को काॅपर सेविगं के लिए उपयोग किया जाता हैं । 
इस ट्रांसफॉर्मर में एक ही वाइंडिंग प्राइमरी और सेकेंडरी वाइंडिंग का काम करती है जो कि डबल वाइंडिंग ट्रांसफॉर्मर की तरह ही कोर पर लपेटी जाती हैं । 
डबल वाइंडिंग ट्रांसफॉर्मर में प्रयोग होने वाली काॅपर का भार प्राइमरी और सेकेंडरी में बहने वाली धारा और उसके फेरों पर निर्भर करता हैं ।
ठीक इसी प्रकार ऑटो ट्रांसफॉर्मर में आवश्यक काॅपर का भार AC और BC भाग में बहने वाली धारा और इन भाग के फेरों पर निर्भर करता है ।             
          WAC = I ( N1 - N2 )
          WBC = N2 ( I2 - I1 ) 


Wa =  ऑटो ट्रांसफॉर्मर का वजन
W2 =  डबल वाइंडिंग ट्रांसफॉर्मर का वजन
माना k = .9 या वोल्टेज के मान से बहुत अधिक बदलाव नहीं होता है तब यदि हम तुलना करें तब डबल वाइंडिंग ट्रांसफॉर्मर की तुलना में ऑटो ट्रांसफॉर्मर में आवश्यक काॅपर का मान .1 गुना डबल वाइंडिंग ट्रांसफॉर्मर के वजन के बराबर होता है।

ऑटो ट्रांसफॉर्मर का उपयोग

ऑटो ट्रांसफॉर्मर का बहुत सी जगहों पर किया जाता है
(1) 3-फेज इंडक्शन मोटर के स्टार्टर के रूप में
(2) बूस्टर के रूप में
(3) इंडक्शन टाइप भट्टियों में वोल्टेज कंट्रोल के लिए
(4) लैंब में प्रेक्टिकल कार्यो के लिए


Er. Chand जुलाई 06, 2021
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   ट्रांसफॉर्मर का शाॅर्ट सर्किट टैस्ट

इस टेस्ट का प्रयोग ट्रांसफॉर्मर के फुल लोड काॅपर लोस, टोटल प्रतिरोध और टोटल प्रतिघात ज्ञात करने के लिए किया जाता हैं ।
इस टेस्ट में उच्च वोल्टेज साईड को मीटर की साईड की और निम्न वोल्टेज साईड को एक बहुत कम प्रतिरोध वाले तार द्वारा शाॅर्ट सर्किट किया जाता हैं ।
उच्च वोल्टेज साईड में ऑटो ट्रांसफॉर्मर की सहायता से वोल्टेज अप्लाई किया जाता हैं यह वोल्टेज धीरे धीरे तब तक बढायी जाती है जब तक सर्किट में लगाया मीटर रेटेड करन्ट प्रदर्शित ना करें ।
अप्लाई की गई वोल्टेज रेटेड वोल्टेज की लगभग 5 से 10% होती हैं ।





Er. Chand जुलाई 06, 2021
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  ट्रांसफॉर्मर का ओपन सर्किट टैस्ट

इस टैस्ट को नो लोड टैस्ट भी कहते हैं और इसकी सहायता से ट्रांसफॉर्मर के आयरन लोस, नो लोड करंट, Ie, Im, नो लोड कम्पोनेंट्स और नो लोड पावर फैक्टर ज्ञात किया जाता हैं ।
इस टेस्ट के लिए ट्रांसफॉर्मर की निम्न वोल्टेज साईड में मीटर लगाए जाते हैं और उच्च वोल्टेज साईड को खुला रखा जाता हैं । 
निम्न वोल्टेज साईड की रेटेड वोल्टेज को ऑटो ट्रांसफॉर्मर की सहायता से आप।अप्लाई किया जाता है और उच्च वोल्टेज साईड बिना लोड के खुली रखी जाती हैं । 
अमीटर,वोल्ट मीटर और वाट मीटर की सहायता से निम्न वोल्टेज साईड की, धारा, वोल्टेज और इनपूट पावर मापी जाती हैं । 
जब उच्च वोल्टेज साईड खुली होती है तब निम्न वोल्टेज साईड में लगा अमीटर नो लोड धारा,  वोल्ट मीटर रेटेड वोल्टेज और वाट मीटर आयरन लोस मापता हैं ।




Er. Chand जुलाई 06, 2021
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 ट्रांसफार्मर एक लौहे के टैंक में रखा ऐसा स्थिर यन्त्र होता है जो ए सी वोल्टेज को ( आवृत्ति को बिना बदले ) बढ़ा या घटा कर एक विधुत परिपथ से दूसरे विधुत परिपथ में भेजता है। ट्रांसफॉर्मर का उपयोग आज बड़े से बड़े और छोटे से छोटे उपकरणों में किया जा रहा है। एक तरफ ये बड़े ट्रांसफॉर्मर के रूप में सब स्टेशन पर पाॅवर ट्रांसफॉर्मर की तरह प्रयोग किया जा रहा है। और दूसरी तरफ ये छोटे ट्रांसफॉर्मर के रूप में चार्जर के अन्दर प्रयोग किया जा रहा है।

 चार्जर में एक step down transformer होता है। जो 220 वोल्ट सप्लाई को 12 वोल्ट में बदल देता है। चार्जर के अन्दर लगा रेक्टीफायर इस 12 वोल्ट ए सी सप्लाई को 12 वोल्ट डी सी सप्लाई में बदल देता है।ये 12 वोल्ट डी सी सप्लाई ही मोबाइल की बैटरी को चार्ज करने के लिए प्रयोग की जाती है। आज हम transformer के बारे में विस्तार से बात करेंगे। जैसे transformer in hindi,इसके भाग क्या क्या होते है,ये कितने प्रकार के होते है और इसका कार्य सिध्दांत क्या होता है तों चलिए शुरू करते है।

Transformer ( परिणामित्र ) क्या होता है

परिणामित्र (Transformer) एक ऐसा स्थिर यन्त्र (static device) हैं जिसका उपयोग प्रत्यावर्ती वोल्टेज (a.c voltage) के स्तर (level) को घटाने या बढ़ाने के लिए किया जाता हैं । यह विधुत ऊर्जा को फैराडे के विधुत चुम्बकीय प्रेरण के नियम पर एक सर्किट से दूसरे सर्किट में आवृत्ति (frequancy) में बिना परिवर्तन (change) किये पहुंचाता है ।

Transformer में एक चुम्बकीय कोर होती है जो कि उच्च पारगम्यता वाले पदार्थ सीलिकन स्टील (high permibility material silicon steel) की बनी होती हैं । इस पर दो winding लिपटी होती है जिन्हें high voltage और low voltage कहा जाता हैं । यही winding primary और secondary के रुप में जानी जाती हैं । Primary winding को सप्लाई सिस्टम से कनेक्ट करते हैं और secondary winding पर load कनेक्ट किया जाता हैं । 
जब सेकेण्डरी वाइंडिंग ओपन होती है और प्राइमरी को सप्लाई से जोड़ते हैं तब प्राइमरी वाइंडिंग में बहने वाली धारा नो लोड धारा (no load current) कहलाती हैं ।

(नो लोड धारा × प्राइमरी वाइंडिंग के फेरों), के कारण एक चुम्बकीय वाहक बल (magnetic motive force,mmf) उत्पन्न होता है जो कि कोर के अन्दर प्रतिवर्ति फलक्स (alternately flux) स्थापित करता है । इस फलक्स के कारण प्राइमरी वाइंडिग मे स्वः प्रेरण (self induction) विधुत वाहक बल (EMF) उत्पन्न होता हैं ।

इसे भी देखें : auto transformer in hindi

Transformer का कार्य सिद्धान्त

Transformer फैराडे के विधुत चुम्बकीय प्रेरण के सिध्दांत पर कार्य करता है। जब transformer की प्राइमरी साइड में ए सी सप्लाई को जोड़ा जाता है तों transformer की कोर में एक फ्लक्स उत्पन्न होता है। यह फ्लक्स समय के साथ परिवर्तित होता है। जिसके कारण प्राइमरी वाइंडिंग में एक विधुत वाहक बल उत्पन्न होगा। यह विधुत वाहक बल प्राइमरी वाइंडिंग में बहने वाली धारा का विरोध करता है (लैंज के नियम के अनुसार)। स्व:प्रेरण के कारण यह फ्लक्स सेकेंडरी वाइंडिंग से भी लिंक करेगा। जिससे सेकेंडरी वाइंडिंग में भी एक विधुत वाहक बल उत्पन्न होगा (अन्योयं प्रेरण के कारण)। और यदि सेकेंडरी वाइंडिंग पर भार को लगाया गया है तों उसमें एक विधुत धारा बहने लगेगी। इस धारा के द्वारा उत्पन्न होने वाला फ्लक्स प्राइमरी वाइंडिंग के फ्लक्स का विरोध करता है
 transformer in hindi Transformer में उत्पन्न होने वाला विधुत वाहक बल स्थिर होता है जिसकी दिशा का लैंज के नियम द्वारा पता लगाया जाता है।

Transformer के मुख्य भाग

यहां बात करेंगे हम transformer के जो main part होते है उनके बारे में जैसे हमने अभी ऊपर पड़ा है कि transformer में कोर होती है, वाइंडिंग होती, टैंक होता है और काफी सारे भाग होते है तो अब में आपको इनके बारे में एक एक करके आराम से समझाऊंगा।

                        क्रोड़ (Core)

Transformer की कोर को हम high permeability वाले पदार्थ से बनातें है ताकि कोर में हिटेरिसिस हानियां कम की जा सके। इन कोर को सीलिकन स्टील की काफी सारी पत्तियों को लेमिनेटेड करके वार्निश इंशुलेशन लगाकर बनाया जाता है लेमिनेशन करने से कोर का प्रतिरोध बढ़ जाता है। जिससे कोर में होने वाले eddy current loss कम हो जाते है। इस लेमिनेशन की मोटाई 0.35mm से 0.5mm रखते है। 
कोर को बनाने के लिए CRGO steel का प्रयोग भी किया जाता है।
CRGO ( Cold Rolled Grain Oriented ) 

प्राथमिक कुण्डली (primery winding)

Transformer की जिस कुण्डली को ए सी सप्लाई दी जाती है या transformer के जिस और इनपूट दिया जाता है। उसे transformer की प्राथमिक कुण्डली कहते है।

द्वितियक कुण्डली (secondary winding)

Transformer की जिस तरफ भार जोड़ा जाता है या जिस तरफ से transformer का आउटपुट प्राप्त होता है। उसे transformer की द्वितियक कुण्डली कहते है।


                   Conservator Tank

इस टैंक का इस्तेमाल large transformer या power transformer में किया जाता है ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌power transformer काफी बड़े होते है। इनका उपयोग सब स्टेशन पर किया जाता है। इन transformer पर भार 24 घंटे रहता है जिससे ये बहुत गर्म हो जाते है। transformer की गर्मी को conservator tank के द्वारा ही बाहर निकाला जाता है। 
Conservator tank में तेल का स्तर tank के आयतन का 50 प्रतिशत होता है। इस टैंक में ऊपर की ओर एक छिद्र होता है। जब transformer का तेल गर्म हो जाता है तो गर्म तेल ऊपर conservator tank में आ जाता है। छिद्र के द्वारा तेल की गर्मी बाहर निकल जाती है और तेल ठंडा हो जाता है। ये तेल फिर से transformer tank में चला जाता है और ये प्रोसेस ऐसे ही चलता रहा है।

                             Brither


यह transformer के बाहर लगा एक डब्बा सा होता है। जिसके अन्दर सिलिका जैल को रखा जाता है। जब conservator tank के द्वारा transformer की गर्मी को बाहर निकाला जाता है तो उसी वक्त बाहरी वातावरण से नमी तेल में मिल जाती है जिससे तेल की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है ‌‌‌‌‌‌‌तो तेल से इस नमी को दूर करने का काम सिलिका जैल करता है। सिलिका जैल इस नमी को अपने अन्दर शौख लेता है।
 जब सिलिका जैल को शुरुआत में ब्रिदर में रखा जाता है तो इसका रगं निला होता है जैसे जैसे ये नमी को शौखता जाता है इसका रगं गुलाबी रंग में बदलने लगता है और जब इसकी नमी शौखने की क्षमता खत्म हो जाती है इसका रंग डार्क गुलाबी हो जाता है। 

                        ब्कोल्ज रीलें 

Conservator tank और transformer tank के बीच ब्कोल्ज रीलें को लगाया जाता है। इस रीलें का काम हमे सूचित करना होता है। इस रिले के अन्दर एक इंडिकेटर लगा होता है जो तेल के स्तर को बताता है। और ये रिले transformer की protection भी करता है। जब transformer के अन्दर कोई छोटा फाल्ट आता है तो ये रीलें एक सिग्नल देता है और जब transformer के अन्दर खतरनाक फाल्ट आता है तो ये रीलें सप्लाई को trip कर देती है transformer in hindi 

              Transformer Tank

Transformer को एक लौहे से बने टैंक में रखा जाता है। यह मजबूत लौहे का बना होता है। ट्रांसफॉर्मर को इस टैंक में रख कर तेल भर दिया जाता है। ये तेल ट्रांसफॉर्मर को ठंडा करने का काम करता है और ट्रांसफॉर्मर की काॅयल के इंशूलेशन को खराब होने से बचाता है। और ये टैंक transformer को बाहरी वातावरण से होने वाले नुकसान से बचाता है। बारीश, आंधी, तूफान में ये transformer को सुरक्षा प्रदान करता है ‌ 

       Transformer की अर्थिगं

Transformer पूरे transmission system का एक मुख्य डाॅचा होता है। यदि transformer में खराबी आ जाये तो पूरी सप्लाई बन्द हो जाती है। सब स्टेशन पर इस्तेमाल होने वाले transformer काफी बड़े होते है। और इनकी शुरुआती किमत भी बहुत ज्यादा होती है। पूरे सब स्टेशन में transformer सबसे महंगा उपकरण होता है। इसलिए transformer की अर्थिगं करना बहुत जरूरी होता है। जिससे यदि कभी आसमानी बिजली transformer पर गिरती है तो transformer को कोई नुक्सान न पहुंचे। इसलिए transformer को आसमानी बिजली से बचाने के लिए इसकी अर्थिगं करना जरूरी है।

           Transformer के प्रकार

Transformer कई प्रकार के होते है। जैसे कुछ transformer कोर के आधार पर बनाये जातें है और कुछ transformer फेज के आधार पर बनाये जातें है। तों चलिए बात कर लेते है कुछ प्रमुख transformer के बारे में तों सबसे पहले बात करते है सब स्टेशन पर प्रयोग किया जाने वाला power transformer की

(1) Power transformer

पावर transformer  वह transformer हैं जिनका उपयोग जैनरेटिगं स्टेशन और टाॢन्समिशन में किया जाता है 250KVA से ऊपर के सभी transformer power transformer की श्रेणी में आते हैं । यह transformer 1-phase और 3-phase होते हैं ।
3-phase system में delta-delta, delta-star connection use किये जाते हैं ।
इन transformer पर कनेक्ट भार हमेशा full load रखा जाता हैं और हल्के भार (lightly load) पर इन्हे disconnect कर दिया जाता हैं ।
इनकी maximum efficiency full load पर रखी जाती हैं और iron and copper loss का रेशों 1ः1 रखा जाता हैं ।
इन transformer में उपयोग होने वाली flux density 1.5 tesla से 1.7 tesla के बीच होती है और वोल्टेज रेगुलेशन का मान 6-10% के नजदीक होता हैं ।

Cooling के लिए इनमें Oil cooling, forced air cooling, forced water cooling का उपयोग किया जाता हैं ।

(2) Distribution Transformer

वह transformer जो distribution में उपयोग होते हैं distribution transformer कहलाते हैं । इनकी रेटिंग अधिकतम 200KvA तक होती है इनमें उपयोग किये जाने वाले कनेक्शन delta-star और star star होते हैं । और इनकी maximum efficiency full load पर ना होकर near to full load होती हैं । इनके iron और copper loss का रेशों 1ः3 रखा जाता हैं । और इनका वोल्टेज रेगुलेशन लगभग 4-8% के बीच होता हैं । इनकी कोर की flux density लगभग 1.7tesla रखी जाती हैं । इनमें self oil cooling का उपयोग किया जाता हैं ।

(3) Three phase transformer

3-phase transformer का basic principle 1-phase transformer के समान ही है । इसकी प्राइमरी और सेकेंडरी में 3 pairs ह़ोते हैं । जिन्हें आवश्यकता अनुसार star और delta में जोडा जाता हैं ।

Connection के आधार पर ये transformer 4 प्रकार के होते हैं ।

(1) star star connection
(2) delta delta connection
(3) star delta connection
(4) delta star connection

Transformer की हानियां ( Losses of transformer )

Transformer में दो प्रकार की हानियां होती है

(1) स्थिर हानियां (constant loss) या लोह हानियां (iron loss) 
(2) अस्थिर हानियां (variable loss) या ताॅम्र हानियां (copper loss)

(1) स्थिर हानियां ( constant loss )

Transformer की कोर में होने वाले loss को लोह हानियां (iron loss) कहते हैं । चुकि कोर में स्थापित फलक्स प्रतिवर्ति व्यवहार (nature) का होता है । इसलिए कोर में दो प्रकार की हानियां उत्पन्न होती है
(a) hysteresis loss
(b) Eddy current loss

(a) Hysteresis loss

विधुत वाहक बल के प्रत्येक चक्कर के लिए hysteresis loop बनता है और प्रति सेकेण्ड बनने वाले hysteresis loop का मान

यहां
  Ph = hysteresis loss
   n = hysteresis coffiecient
   v = volume of core in meter qube
  Bmax = maximum flux density
  f = supply frequently
n का मान1.5-2.5 के बीच होता है और सीलिकन स्टील के लिए इसका मान 1.6 लिया जाता हैं ।

(b) Eddy current loss

प्रत्यावर्ती चुम्बकीय क्षेत्र के कारण ही कोर के अन्दर एक वोल्टेज उत्पन्न होती है जिससे बन्द पाथ मिलने के कारणeddy current उत्पन्न होती है यह eddy current कोर में eddy current loss उत्पन्न करती हैं । जिसका मान 

जहां
   Pe = eddy current loss
  Ke = constant
   t = thickness of core

(2) अस्थिर हानियां ( Variable loss ) 

Transformer की प्राइमरी और सेकेंडरी वाइंडिंग के कारण होने वाले I"×R losses copper loss कहलाते हैं

I" का मतलब सेकेण्डरी वाइंडिंग की धारा

हम जानते हैं कि प्राइमरी वाइंडिंग में बहने वाली धारा I' और सेकेंडरी वाइंडिंग में बहने वाली धारा I" हैं
यदि फुल लोड हो तो transformer में होने वाले टोटल लोस का मान full load copper loss कहलायेगा ।

Transformer का open circuit test

Transformer का open circuit test रेटेड वोल्टेज और रेटेड आवृत्ति पर किया जाता है। इस टैस्ट के द्वारा transformer की वाइंडिंग में होने वाले core loss का पता लगाया जाता है। 
इस टेस्ट को करने के लिए transformer की law voltage side का इस्तेमाल किया जाता है। क्योंकि law voltage side में law range वाले उपकरणों की आवश्यकता होगी। और ये उपकरण आसानी से मिल जाते है।
इस टेस्ट को law voltage side में करने से safety भी बनी रहती है।

                   Short circuit test

Short circuit test को transformer की high voltage वाली वाइंडिंग की साइड perform किया जाता है। इस टेस्ट के द्वारा transformer के copper loss का पता लगाया जाता है। 

Transformer का parallel operation

आज के समय में विधुत का उपयोग बहुत अधिक हो रहा है। फिर चाहे वो औधौगिक क्षेत्र हो या डोमेस्टिक क्षेत्र हर क्षेत्र में विधुत की जरूरत बढ़ती ही जा रही है। जैसे जैसे विधुत का उपयोग ज्यादा किया जाता है। वैसे वैसे transformer पर भी भार बढ़ता जाता है। जिससे transformer में आग लगने का खतरा बना रहता है ‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌transformer को इस घटना से बचाने के लिए दो transformer को समांतर में प्रयोग किया जाता है। 
दो transformer को समांतर में प्रयोग करने के लिए उनकी कुछ चीजों का आपस में मिलना और समान होना जरूरी होता है। जिनको मैंने नीचे बताया है।

(1) दोनों transformer की polarity समान होनी चाहिए।
(2) दोनों transformer की वोल्टेज रेटिंग समान होनी चाहिए।
(3) दोनों transformer का turn retio समान होना चाहिए।
(4) दोनों transformer का per unit impedance समान होना चाहिए।
(5) दोनों transformer का X/R retio समान होना चाहिए।

Transformer का transmission system में उपयोग

विधुत को 11kv वोल्टेज के आस पास generate किया जाता है। फिर इस 11kv वोल्टेज को transformer के द्वारा 400kv वोल्टेज में step up करके transmission line के द्वारा सब स्टेशन पर लाया जाता है। सब स्टेशन पर इस 400kv वोल्टेज को फिर से transformer के द्वारा 11kv वोल्टेज में step down कर दिया जाता है। सब स्टेशन से इस 11kv वोल्टेज को distribution transformer तक ले जाया जाता है। Distribution transformer 11kv को 220v वोल्टेज में step down कर देता है। ये 220 वोल्टेज विधुत पोल के द्वारा consumer तक आती है। इस प्रकार विधुत ऊर्जा हमें प्राप्त होती है। इस पूरे process में transformer एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। 

Transformer (परिणामित ) की कुछ मुख्य बातें

transformer एक ऐसा यन्त्र होता है जो एक ही स्थान पर रखा रहता है। इसके अन्दर कोई भी घूमने वाला भाग नहीं होता है। transformer को लौहे के एक टैंक में विधुतरोधी तेल डालकर रखा जाता है। 
Transformer की दोनों वाइंडिंग के बीच अनन्त प्रतिरोध होता है क्योंकि दोनों वाइंडिंग एक दूसरे से अलग होती है। इनमें कोई भी electrically connection नहीं होता। 

Transformer a.c voltage को घटाने और बढ़ाने का काम इसलिए कर सकता क्योंकि इसकी दोनों वाइंडिंग में magnetic coupling बन जाती है। 
Transformer को सर्किट में जोड़ने से पहले यह पता नहीं लगा सकते कि प्राइमरी वाइंडिंग कौनसी है और सेकेंडरी वाइंडिंग कौनसी है। उस समय बस ये कह सकते है जिस वाइंडिंग में अधिक turn होंगे उसे high voltage winding और जिस वाइंडिंग में कम turn होंगे उसे low voltage winding 
Transformer की दोनों वाइंडिंग में आवृत्ति समान रहती है।
Transformer एक रूका हुआ यानी स्थिर यन्त्र होने के कारण इसकी दक्षता (efficiency) काफी अच्छी (batter) होती है। जितने भी घूमने वाले यन्त्र होते है उनकी दक्षता 50 प्रतिशत तक कम हो जाती है लेकिन transformer के स्थिर होने के कारण ही इसकी दक्षता 90 से 99 प्रतिशत के बीच में रहती है।

हैलो दोस्तो आज की इस आर्टिकल में हमने जाना है कि transformer in hindi और इसके विभिन्न भागों के काम की भी जानकारी हमने ग्रहन की है अगर पोस्ट को पढ़कर आपको मजा आया है और सिखने को कुछ मिला है तो कमेंट करके जरूर बताइए यार आपके कॉमेंट से हमें लिखने के लिए प्रेरित करता है। हमारे लेख को पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद।


Er. Chand जुलाई 05, 2021
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