transformer ki maintenance : ट्रांसफार्मर का काम क्या होता है?

 transformer ki maintenance 

पावर ग्रीड और सब स्टेशन के अन्दर बड़े बड़े परिणामित्र लगें होते है। सब स्टेशन में सभी उपकरणों में ट्रांसफॉर्मर सबसे महंगा यन्त्र होता है इसलिए इसकी देखभाल करना बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है। आज हम इस लेख में transformer ki maintenance के बारे में ही जानेंगे।
ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत करने के काफी सारे शेड्यूल होते है जैसे घंटों के बेस पर मेंटिनेंस करना, रोजाना के बेस पर, महिने के बेस पर, तीन महीने के बेस पर, अर्ध वार्षिक बेसिस पर और वार्षिक बेसिस पर इन सभी शेड्यूल के बेसिक पर transformer ki maintenance की जाती है। नीचे इन सभी शेड्यूल के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करेंगे कि कैसे इन शेड्यूल में ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत की जाती है।

transformer ki maintenance


• घंटों के बेसिस पर (hourly basis)

पावर ग्रीड या सब स्टेशन के अन्दर जो ओपरेटर होते है वो हर एक घंटे बाद परिणामित्र की निम्न चीजों की देख रेख करते है और उन सभी अपने रजिस्टर में लिखते है। जैसे ट्रांसफॉर्मर की प्राइमरी साइड में कितना भार जुड़ा हुआ है और transformer की आउटपुट वोल्टेज को चैक करते है। तिसरी चीज इस शेड्यूल में तेल का तापमान चैक करते है।

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• रोजाना बेसिस पर (daily basis) 

इस शेड्यूल में सबसे पहले यह चैक करते है कि ट्रांसफॉर्मर टैंक से कहीं तेल तो नहीं निकल रहा है यदि टैंक से कहीं को तेल का रिसाव होता है तो इसे जल्दी ही ठीक किया जाता है। फिर इसमें परिणामित्र की काॅयल का ताप देखा जाता है कि वह नाॅर्मल है या नहीं। इसका पता ट्रांसफॉर्मर के मार्सिलिंग बाॅक्स में दो चीजों को देखने से पता चलता है। पहला है वाइंडिंग टेम्प्रेचर इंडिकेटर और दूसरा है ओयल टेम्प्रेचर इंडिकेटर इन दोनों इंडिकेटर की मदद से वाइंडिंग और तेल के तापमान पता चल जाता है। तिसरी चीज इस शेड्यूल में कंजर्वेटर टैंक में तेल का लेवल चैक किया जाता है और चौथी चीज बुसिंग में ओयल का स्तर चेक करते है फिर इसी के हिसाब से transformer ki maintenance की जाती है।

• महिने वार (monthly basis) 

इस शेड्यूल में सबसे पहले ट्रांसफॉर्मर की ब्रिदर को चैक करते है। ब्रिदर कंजर्वेटर टैंक से कनेक्ट होती है इसमें सबसे नीचे के हिस्से में तेल के लेवल को चैक किया जाता है। ब्रिदर के ऊपरी हिस्से में निले रंग का सिलिका जेल भरा होता है इसका काम तेल से नमी को निकालना होता है। जब इसका रंग गुलाबी हो जाता है तो ये खराब हो जाता है इसकी नमी को ऐब्जोर्ब करने की ताकत खतम हो जाती है। ब्रिदर के अन्दर फिर दुसरा सिलिका जेल डाला जाता है या इसको अधिक तापमान पर गर्म करके दोबारा से प्रयोग में लाया जा सकता है। दूसरी चीज इसमें बुकोल्ज रिले में ओयल के लेवल को चैक करते है।

• तीन महीने पर (three month basis) 

हर तीन महीने बाद ट्रांसफॉर्मर की बुसिंग को चैक करना होता है क्योंकि इनमें गंदगी धूल मिट्टी के कण बैठ जाते है जिसकी वजह से बुसिंग की विधुतरोधी ताकत कम हो जाती है और इनका ब्रेकडाउन होने का खतरा बढ़ जाता है इसलिए बुसिंग की हर तीन महीने बाद मरम्मत करना जरूरी होता है।
दूसरी चीज इस शेड्यूल में transformer oil की टेस्टिंग की जाती है जिसे ओयल ब्रेकडाउन वोल्टेज टेस्ट कहते हैं। और हर तीन महीने बाद जितने भी बड़े परिणामित्र होते है उनके अन्दर जो कूलिंग फैन लगें होते है जो मैन्यूवली और ओटोमेटिक दोनों तरिके से काम करते हैं। यह फैन transformer की वाइंडिंग को ठंडा करने का काम करते है इसलिए इनकी काम करने की पर्फोमेंस को भी चैक किया जाता है।

• अर्ध वार्षिक बेसिस पर (half yearly basis) 

हर छं महिने बाद ट्रांसफॉर्मर ओयल की सम्पूर्ण टेस्टिंग की जाती है जिसमें तेल में मोजूद अम्लता को चैक किया जाता है क्योंकि यदि तेल अधिक अम्लीय होगा तो तेल में जल जल्दु मील जाता है फिर इसमें तेल में मोजूद sludge content को देखते है क्योंकि यह ओयल को जल्दी ठण्डा नहीं होने देते है इसी प्रकार से और भी बहुत सी तेल की टेस्टिंग की जाती है।

• वार्षिक बेसिस पर (yearly basis)

transformer ki maintenance के इस शेड्यूल में ग्रीड या सब स्टेशन में जो ट्रांसफॉर्मर होते है उसकी पूरी तरह से मेंटिनेंस की जाती है। जिसके लिए सब स्टेशन को कुछ घंटों के लिए शड डाउन किया जाता है। इसमें बुकोल्ज रिले के मैकेनिकल फंक्शन को चैक किया जाता है देखा जाता है कि इसके ट्रिपिंग और अलार्म कोन्टैक्ट अच्छे से काम कर रहे है या नहीं। और इस शेड्यूल में परिणामित्र का मार्सिंग बाॅक्स और उसमें लगें इंडिकेटर को अच्छे से साफ किया जाता है और दखा जाता है कि ये सही से चल रहे है या नहीं चल रहे। और कूलिंग फैन को भी चैक किया जाता है कि वे हिल तो नहीं रहें या फिर ज्यादा आवाज तो नहीं कर रहे और ट्रांसफॉर्मर का इंसुलेशन प्रतिरोध को भी चैक किया जाता है और परिणामित्र अर्थिंग भी चैक की जाती है और सबसे बाद में यदि transformer की बाॅडी की सर्फेश खराब हो गई है या उसका पेंट खराब हो गया हो तो उसकी बाॅडी पर दौबारा से पेंट किया जाता है।

तो यही था transformer ki maintenance का पूरा लेखा जोखा जो आपको इस छोटी सी जानकारी में मैंने बताया है उम्मीद करता हूं कि आप सब को यह पोस्ट अच्छी लगी होंगी। आप की तरह और भी आपके ऐसे इलैक्ट्रिकल मित्र होंगे जिन्हें ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत के बारे में पता नहीं होगा तो आप इस पोस्ट को अपने उन मित्रो के साथ भी शेयर जरूर किजिए।

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