Results for Magnetic Circuit

 चुंबकन क्षेत्र (Magnetising field)

जब कोइ चुंबकीय पदार्थ किसी चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है तो वह चुंबकित हो जाता है अर्थात उसमें भी चुंबक का गुण आ जाता है। चुम्बकीय पदार्थों के इस प्रकार चुम्बकत्व ग्रहण करने की क्रिया को चुंबकन कहते हैं। इस चुंबकीय क्षेत्र को जिसके कारण पदार्थ में चुम्बकत्व का गुण आया है, चुंबकन क्षेत्र या चुम्बकीय प्रेरण कहते है। चुंबकन क्षेत्र भी एक चुंबकीय पदार्थों के गुण है आगे और इसके कुछ गुणों के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे।

चुंबकन की क्रिया में चुंबकीय पदार्थों के सिरों की चुम्बकीय ध्रुवता चुम्बकन क्षेत्र की ध्रुवता के विपरित बनती है अर्थात् चुंबकन क्षेत्र में उत्तरी ध्रुव की ओर वाला चुंबकीय पदार्थ का सिरा दक्षिणी ध्रुव तथा क्षेत्र के दक्षिणी ध्रुव की ओर वाला सिरा उत्तरी ध्रुव पर बनता है। अतः चुम्बकित पदार्थ की चुम्बकीय बल रेखायें चुंबकन क्षेत्र की बल रेखाओं के विपरित दिशा में होती है। चुंबकीय पदार्थ की बल रेखाओं को प्रेरण बल उत्पन्न रेखायें कहते हैं।

किसी बिंदु पर चुम्बकन क्षेत्र की त्रिवता उस बल से मापी जाती है जो उस पर स्थित एकांक उत्तरी ध्रुव पर कार्य करता है। दूसरे शब्दों में चुंबकन क्षेत्र की त्रिवता उन बल रेखाओं की संख्या के बराबर होती है जो उस बिंदु पर स्थित एकांक क्षेत्रफल के लम्बवत गुजरती है। इसका CGS पद्ति में मात्रक आर्स्टेड या गौस होता है और MKS पद्ति में मात्रक वेबर/मीटर वर्ग होता है।

चुंबकीय फ्लक्स घनत्व (Magnetic flux density)

किसी चुम्बकीय क्षेत्र में चुंबकीय बल रेखाएं ही चुम्बकीय क्षेत्र की प्रतिक होती है। चुंबकन की क्रिया में दो चुम्बकीय क्षेत्र होते है अर्थात् दो प्रकार की बल रेखाएं होती हैं। एक तो चुंबकन क्षेत्र की बल रेखाएं और दूसरी चुम्बकित पदार्थ की बल रेखाएं। चुंबकन क्षेत्र की बल रेखाओं को अविरत रेखाओं द्वारा और चुंबकीय पदार्थ की बल रेखाओं को बिंदुदार रेखाओं द्वारा प्रर्दशित किया जाता है। पदार्थ के अन्दर किसी बिंदु पर परिणामी चुम्बकीय क्षेत्र की त्रिवता इन दोनों चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रताओं के योग के बराबर होती है। इस परिणामी तीव्रति को ही चुंबकीय फ्लक्स घनत्व कहते हैं। इसको चुंबकीय प्रेरण का संख्यात्मक मान भी कहते है, इस राशि को B से व्यक्त किया जाता है, यह एक सदिश राशि है और इसका एस आई मात्रक वेबर प्रति मीटर वर्ग होता है।


चुंबकन की तीव्रता

किसी चुम्बकित पदार्थ की चुम्बकीय अवस्था का वर्णन जिस भौतिक राशि द्वारा किया जाता है, वह चुंबकन की तीव्रता कहलाती है। इसको I से प्रर्दशित करते है यह एक सदिश राशि है, इसका परिमाण प्रति एकांक आयतन चुंबकीय आघूर्ण के बराबर होता है।
चुम्बकित पदार्थ की चुम्बकीय अवस्था उसकी चुम्बकन तीव्रता से ज्ञात की जाती है। यदि किसी चुंबकीय पदार्थ को H तीव्रता वाले चुंबकन क्षेत्र में रखने पर प्रेरण द्वारा उसमें M चुंबकीय आघूर्ण उत्पन्न हो और पदार्थ का आयतन V हो तो चुंबकन तीव्रता

                    I = M / V

इसका मात्रक ऐम्पीयर प्रति मीटर होता है।

चुंबकीय प्रवृत्ति

किसी निश्चित शक्ति के चुंबकीय क्षेत्र में किसी चुम्बकीय पदार्थ को रखने पर उसमें ऊत्पन्न चुम्बकत्व की मात्रा जितनी अधिक होती है, उसकी चुंबकीय प्रवृत्ति उतनी ही अधिक कही जाती है। अतः चुम्बकीय प्रवृत्ति से तात्पर्य, पदार्थ द्वारा सरलता से चुम्बकत्व ग्रहण करने की क्षमता से हैं। किसी पदार्थ में ऊत्पन्न चुंबकन की तीव्रता I और चुंबकन क्षेत्र H के अनुपात को उस पदार्थ की चुम्बकीय प्रवृत्ति कहते हैं। नर्म लौहा स्टील की अपेक्षा अत्यंत सरलता से अधिक शक्ति का चुंबकन बनाया जा सकता है, जबकि दोनों पर कार्य कारी चुम्बकीय क्षेत्र बराबर हो। नर्म लौहे की चुंबकीय प्रवृत्ति स्टील से अधिक होती है।

चुंबकशीलता (Permeability) 

वायु की अपेक्षा लौहे या अन्य किसी चुंबकीय पदार्थ में से चुम्बकीय बल रेखाओं की संख्या जितनी अधिक गुजरती है उसकी चुंबकशीलता उतनी ही अधिक कही जाती है। अतः चुम्बकीय बल रेखाओं के लिए पदार्थ की चालकता से तात्पर्य ही उसकी चुंबकशीलता से होता है।
यदि किसी पदार्थ को चुंबकन क्षेत्र H में रखने पर उसमें चुम्बकीय फ्लक्स घनत्व B हो तो पदार्थ की चुंबकशीलता, B और H के अनुपात के बराबर होती है। इसे म्यू से दर्शाया जाता है।

दूसरे शब्दों में, किसी चुम्बकन क्षेत्र में रखें किसी पदार्थ के एकांक क्षेत्रफल से लम्बवत गुजरने वाली बल रेखाओं की संख्या B और पदार्थ की अनुपस्थिति में वायु के एकांक क्षेत्रफल से गुजरने वाली चुंबकीय बल रेखाओं की संख्या H के अनुपात को पदार्थ की चुंबकशीलता कहते हैं। नर्म लौहे की चुंबकशीलता बहुत अधिक होती है।

Er. Chand नवंबर 02, 2021
Read more ...

 चोक coil क्या है

प्रत्यावर्ती धारा परिपथों में विधुत ऊर्जा खर्च हुए बिना, विधुत धारा को कम करने के लिए जिस साधन का उपयोग किया जाता है उसे चोक coil कहते हैं। दिष्ट धारा परिपथ में धारा को नियंत्रित करने के लिए प्रतिरोध का प्रयोग किया जाता है, जहां पर I2R ऊर्जा प्रति सेकेण्ड खर्च होती है। डी सी परिपथों में प्रतिरोध का उपयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि डी सी के लिए हमारे पास और कोई साधन नहीं है। चोक coil क्या है आगे इसके बारे में और अच्छे से समझेंगे।

चोक coil की संरचना


चोक कुंडली का कार्य सिद्धांत


चोक coil को बनाने के लिए एक नर्म लौहे की क्रोड पर विधुतरोधी ताॅबे के तार को लपेटा जाता है। इन तारों को पास पास लपेटा जाता है और तार का क्षेत्रफल अधिक यानी के चोक कुण्डली बनाने के लिए एक मोटे तार का प्रयोग किया जाता है ताकि इसके अन्दर भंवर धारा हानि को कम किया जा सके। 
इस चोक coil का ओमीय प्रतिरोध लगभग शून्य रहता है और इसका प्रेरकत्व काफी उच्च रहता है। तारों के अन्दर जो नर्म लौहे की क्रोड होती है इसे आगे पीछे करने के लिए इसमें एक व्यवस्था की जाती है। हम यहां पढ़ रहे है कि चोक coil क्या है कुण्डली के भीतर लौहे की क्रोड को जितनी अधिक दूरी तक प्रविष्ट करा दी जाती है, कुण्डली का प्रेरकत्व और प्रतिबाधा उतनी ही अधिक हो जाती है। कुण्डली का प्रतिरोध नगन्य होने के कारण इसमें विधुत ऊर्जा का गर्मी के रूप में क्षय बहुत ही कम होता है।

चोक का क्या कार्य है

मैंने देखा है कि बहुत से लोग इंटरनेट पर जानना चाहते है कि चोक का क्या कार्य होता है तो चलिए जान लेते है इसका क्या काम होता है, चोक का काम प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में बहने वाली धारा को नियंत्रित करना है अर्थात् उसको आवश्यकता के अनुसार जब कम धारा की जरूरत हो तो कम कर देता है और जब अधिक धारा की आवश्यकता होती है तो धारा को बढ़ा देता है। उम्मीद है कि आप सब समझ गये होगें कि असल में इसका काम होता क्या है।

चोक coil का उपयोग

घरों में प्रयोग की जाने वाली ट्यूब लाइटों, फ्लोरसेंट ट्यूबों और रेडियो में चोक का उपयोग किया जाता है। ट्यूब लाईट में इसको धारा का मान करने के लिए लगाया जाता है, इसे केवल प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में ही प्रयोग किया जा सकता है, डी सी परिपथों में नहीं, क्योंकि दिष्ट धारा की आवृत्ति शून्य होती है, जिसके कारण चोक का प्रेरण प्रतिघात और इसका प्रतिरोध लगभग शून्य ही रहता है। इसलिए डी सी परिपथ में इसका उपयोग करने का कोई फायदा नहीं होता है।

चोक coil क्या है के कुछ महत्वपूर्ण बातें- व्यवहारिक रूप में चोक कुण्डली का ओमीय प्रतिरोध कभी भी शून्य नहीं होता है। क्योंकि प्रतिरोध शून्य केवल आदर्श कुण्डली का हो सकता है, लेकिन आदर्श कुण्डली बनाना सम्भव नहीं है आदर्श चीज सिर्फ एक खयाली पुलाव होती है। कुण्डली के इस सूक्ष्म प्रतिरोध के कारण विधुत ऊर्जा का कुछ हिस्सा ऊष्मा के रूप में व्यय हो जाता है और इसके अतिरिक्त कुछ ऊर्जा क्रोड की शैथिल्य हानि एवं भंवर धारा हानि के कारक भी नष्ट होती है। भंवर धारा हानि के कारण होने वाली हानियों को चोक की क्रोड को पटलित करके कम किया जाता है।

Er. Chand अक्टूबर 09, 2021
Read more ...

 चुंबकत्व क्या होता है

आज से लगभग 470 साल पहले एशिया माइनर में मैग्नेशिया नामक स्थान पर एक गहरे भूरे व काले रंग का पत्थर पाया गया था, जिसमें लौहे के छोटे-छोटे टुकड़ों को अपनी ओर आकर्षित करने का गुण था। मैग्नेशिया में पाये जाने के कारण इसका नाम मैग्नेटाइट रखा गया। इसी नाम से आधुनिक शब्द मैग्नेट की यानी चुंबक की उत्पत्ति हुई। यह पत्थर लौहे खा आक्साइड होता है, जिसका सूत्र Fe3O4 है। चुंबकत्व क्या होता है- मैग्नेटाइट के इस गुण को जिसके कारण यह लौहे के छोटे-छोटे टुकड़ों को अपनी ओर आकर्षित करता है, चुंबकत्व कहते है। 

प्राकृतिक रूप में पाये जाने के कारण मैग्नेटाइट के टुकड़ों को, प्राकृतिक चुंबक कहते है। यदि किसी प्राकृतिक चुंबक को उसके गुरुत्व केन्द्र से बांधकर लटका दिया जाए, तो वह हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में ही ठहरता है। इस चुंबक के अन्दर चुंबकत्व बहुत कम होता है। इसलिए यह लौहे के टुकड़ों को अपनी ओर कम आकर्षित करती है। इन्हें प्रायोगिक कार्यो के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इसके लिए कुछ धातुओं जैसे, लौहा, फौलाद, निकिल और एलनिको जैसी मिश्र धातु से बनायें गए शक्तिशाली चुंबक प्रयोग में लायी जाती है। इस तरह की चुंबक को कृत्रिम चुंबक कहते है। आवश्यकता के अनुसार इन चुंबकों को किसी भी आकार में बनाया जा सकता है। जैसे, दण्ड चुंबक, नाल चुंबक, चुंबकीय सुई जैसी आकृतियों में ढाला जा सकता है। जिन पदार्थों में कृत्रिम रूप से चुंबकत्व ऊत्पन्न किया जा सकता है, उन्हें चुंबकीय पदार्थ कहते है।

चुंबकत्व के गुण (properties of a magnet)


चुंबक चुम्बकीय पदार्थों को अपनी ओर खिंचता है-- जब कभी किसी दण्ड चुंबक को किसी चुम्बकीय पदार्थ के बुरादे या छीलन में डाला जाता है तो वे इस पर चिपक जाते है। चिपके हुए बुरादे की मात्रा चुंबक के सिरों पर अधिकतम और चुंबक के बीच वाले हिस्से पर कम होती है। इससे यह पता लगता है कि चुंबक के किनारों के आस पास चुंबकत्व सबसे अधिक होता है और बीच वाले हिस्से में चुंबकत्व सबसे कम होता है। चुंबक के दोनों किनारों को ध्रुव कहते है। 

• स्वतन्त्रतापूर्वक लटका हुआ चुंबक सदैव उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरता है

यदि किसी चुंबक को एक धागे से बांधकर इस प्रकार लटकाया जाए कि वह एक क्षैतिज तल में स्वतन्त्रतापूर्वक घूम सकें। तो यह चुंबक हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में ही ठहरता है। यदि हम इसको इसकी सन्तुलन की अवस्था से थोडा घुमा दे तब भी यह वापस उसी दिशा में आ जाता है। तो इस चुंबक का जो किनारा उत्तर दिशा की ओर होता है, उसे उत्तरी ध्रुव और जो किनारा दक्षिण दिशा में ठहरता है, उसे दक्षिणी ध्रुव कहते है।इन ध्रुवों को N और S से व्यक्त किया जाता है।

चुंबक चुम्बकीय पदार्थों में प्रेरण द्वारा चुंबकत्व ऊत्पन्न कर देता है- 
यदि किसी शक्ति शाली चुंबक का कोई ध्रुव नर्म लौहे की छड़ के पास लाया जाता है तो वह छड़ खुद एक चुंबक बन जाती है। इस घटना को चुंबकीय प्रेरण कहते हैं। और छड़ के द्वारा चुंबकत्व प्राप्त करने की क्रिया, चुंबकन कहलाती है। छड़ के उस सिरें पर जो चुंबक के ध्रुव के समीप होता है, विजातीय ध्रुव बनता है, दूसरे सिरें पर सजातीय ध्रुव बनता है।

• दो चुंबकों के सजातीय ध्रुवों में परस्पर प्रतिकर्षण और विजातीय ध्रुवों में परस्पर आकर्षण होता है-

यदि हम किसी स्वतन्त्रतापूर्वक लटके चुंबक से उत्तरी ध्रुव के पास एक अन्य चुंबक का उत्तरी ध्रुव लाते हैं तो हम देखते है कि लटका हुआ चुंबक दूसरे चुंबक से दूर भागता है और यदि हम इस चुंबक के उत्तरी ध्रुव के पास, दूसरी चुंबक का दक्षिणी ध्रुव लाते है, तो हम देखते है कि लककी हुई चुंबक दूसरी चुंबक के नजदीक आती है। तो इससे हमें यह पता चलता है कि एक जैसे ध्रुव एक दूसरे को प्रतिकर्षित करते है और अलग-अलग ध्रुव एक दूसरे को आकर्षित करते है।

धारावाही परिनलिका का चुंबकीय व्यवहार

परिनलिका विधुतरोधी तार की बनी एक एक बेलनाकार कुण्डली होती है जिसका व्यास उसकी लंबाई की अपेक्षा बहुत छोटा होता है। प्रायौगिक रूप में इसे कार्ड बोर्ड या मोटे कागज की कम व्यास की लम्बी खोखली नली के ऊपर ताॅबे के विधुतरोधी तार के बहुत से फेरे पास पास लपेटकर बनाया जाता है। इस परिनलिका में किसी बाहरी स्त्रोत द्वारा विधुत धारा प्रवाहित करने पर इसके चारों ओर, अन्दर ओर बाहर के स्थान में चुंबकीय क्षेत्र ऊत्पन्न हो जाता है। जिससे यह एक दण्ड चुंबक की तरह व्यवहार करने लगती है। 
यहां पर हमने जाना है कि किसी चुंबक का चुंबकत्व क्या होता है और इसके गुण क्या क्या होते है और एक धारावाही परिनलिका में चुंबकीय क्षेत्र कैसे बनता है। इन सब के बारे में हमने इस पोस्ट में जाना है पोस्ट को पढ़ने के बाद अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दिजियेगा।

Er. Chand अक्टूबर 07, 2021
Read more ...

 इलेक्ट्रोमैग्नेट क्या है

विधुत चुंबक को बनाने के लिए एक लौहे की छड़ पर या घोड़े के आकार की छड़ पर ताॅबे के तार के बहुत सारे फेरों को लपेटा जाता है। फिर ताॅबे के तार के दोनों सिरों पर एक बैटरी लगाकर विधुत धारा को इस नर्म लौहे की छड़ पर लिपटे ताॅबे के फेरों में प्रवाहित किया जाता है। कुछ घंटों के बाद ये लौहे की छड़ चुंबक बन जाती है। इस प्रकार विधुत चुंबक को बनाया जाता है।

विधुत चुंबक बनाने के लिए ऐसे पदार्थ का उपयोग करते है जिसको कम चुंबकीय क्षेत्र में रखने पर भी अधिक चुंबकीय फ्लक्स उत्पन्न हो जाये और शैथिल्य हानियां बहुत कम हो और जिसकी चुंबकशीलता अधिक ओर धारण क्षमता कम हो। ये सब गुण नर्म लौहे में पाये जाते है इसलिए विधुत चुंबक को बनाने के लिए अधिकतर नर्म लौहे का ही प्रयोग किया जाता है। विधुत चुंबक को बनाने के लिए प्रयुक्त होने वाले पदार्थों के आधार पर विधुत चुंबक दो प्रकार के होते है।

(1) स्थायी चुंबक (permanent magnet) 

स्थायी चुंबक उन चुंबकों को कहते है जिनमें विधुत धारा का प्रवाह बन्द करने के बाद भी चुंबकत्व बाकी रहता है। ये चुंबक ऐसे पदार्थों के बनाये जातें है जिनकी धारणशीलता और निग्राहिता उच्च हो। स्थायी चुंबक को मिश्र धातुओं कोबाल्ट इस्पात, जोकि कोबाल्ट,टंगस्टन और कार्बन की मिश्र धातु है का प्रयोग किया जाता है। और भी काफी सारी मिश्र धातु है जिनका उपयोग स्थायी चुंबक बनाने में किया जाता है जैसे टिकोनल यह टिटेनियम, कोबाल्ट,निकिल की मिश्र धातु है, अभी कुछ समय पहले ही एक नई मिश्र धातु विकिलौय बनायी गई है जो लौहा, कोबाल्ट,वेनेडियम की मिश्र धातु होती है। इस मिश्र धातु की निग्राहिता सबसे ज्यादा होती है।

(2) अस्थायी चुंबक (temporary magnet) 

यदि किसी विधुत चुंबक में विधुत धारा का मान शून्य होने पर उसका चुंबकत्व भी शून्य हो जाता है तो ऐसी चुंबक को अस्थायी चुंबक कहते है। इन चुंबकों का चुंबकत्व धारा को बन्द कर देने के तुरंत बाद ही समाप्त हो जाता है। अस्थायी चुंबक को बनाने के लिए नर्म लौहे का प्रयोग किया जाता है।

विधुत चुंबक का उपयोग

• बड़े आकार के विधुत चुंबक को बड़ी बड़ी कम्पनियों में प्रयोग में लायी जाने वाली क्रेनों के द्वारा लौहे और फोलाद के उपकरणों व गठ्ठो को एक स्थान से दूसरे स्थान पर लें जानें में प्रयोग किया जाता है।
• अस्पतालों में विधुत चुंबक आॅख व शरीर के अन्य किसी भाग से लौहे या फोलाद के छर्रे निकालने में प्रयोग किया जाता है।
• किसी मिश्रण से चुंबकीय पदार्थों को अलग करने में इसका उपयोग किया जाता है।
• वैधुत घण्टी, टेलिफोन, तार संचार, ट्रांसफॉर्मर और विधुत मोटर में विधुत चुंबकों का प्रयोग किया जाता है।

इस पोस्ट में हमने जाना है कि इलेक्ट्रोमैग्नेट क्या है और इलेक्ट्रोमैग्नेट कैसे बनाते है, यह कितने प्रकार की होती है और कुछ इसके उपयोग कहां कहां किया जाता है उसके बारे में भी जाना है। पोस्ट अगर पसंद आयी है तो कमेंट करके जरूर बताइए और इसे अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें।
 
Er. Chand सितंबर 08, 2021
Read more ...

magnetic circuit questions and answers


 बारहवीं कक्षा की परिक्षाओं में पूछें जाने वाले चुंबकीय परिपथ से प्रशनों को यहां पर डिस्कश किया गया है। जितने भी अभी तक आपकी परिक्षा में magnetic circuit questions and answers पूछें गए है उन्ही में से कुछ महत्वपूर्ण प्रशन उत्तर को दिखाया गया है जो आपकी परिक्षा के लिए काफी फायदेमंद साबित होंगे

प्र-1 गतिशील आवेश उत्पन्न करता है :

(अ) केवल विधुत क्षेत्र
(ब) केवल चुम्बकीय क्षेत्र
(स) विधुत क्षेत्र और चुम्बकीय क्षेत्र दोनों
(द) विधुत क्षेत्र और चुम्बकीय क्षेत्र में से कोई नहीं
उत्तर-विधुत क्षेत्र और चुम्बकीय क्षेत्र दोनों

प्र-2 चुम्बकीय क्षेत्र की त्रिवता का मात्रक होता है : 

(अ) वेबर/मीटर
(ब) वेबर/मीटर वर्ग
(स) वेबर
(द) वेबर × मीटर
उत्तर-- वेबर/मीटर वर्ग

प्र-3 बाॅयो सेवर्ट के नियम अनुसार B और r में क्या सम्बन्ध है :

(अ) B समानुपाती r
(ब) B समानुपाती 1/r
(स) B समानुपाती r के वर्ग के
(द) B समानुपाती 1/r का वर्ग
उत्तर-- B समानुपाती 1/r का वर्ग

प्र-4 इनमें से कौन-सा चुम्बकीय क्षेत्र की त्रिवता का मात्रक नहीं है :

(अ) टेस्ला
(ब) वेबर/मीटर वर्ग
(स) न्यूटन/एम्पीयर-मीटर
(द) न्यूटन/ऐम्पीयर वर्ग
उत्तर-- न्यूटन/ऐम्पीयर वर्ग

प्र-5 एक समान चुम्बकीय क्षेत्र B में बल रेखाओं के समांतर एक इलैक्ट्रोन जिसका आवेश e है, वेग v से चलता है। तो इलैक्ट्रोन पर लगने वाला बल है :

(अ) evB
(ब) ev/B
(स) शून्य
(द) Bv/e
उत्तर-- शून्य

प्र-6 किसी एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में एक इलैक्ट्रोन क्षेत्र के लम्बवत दिशा में प्रवेश करता है। तो इलैक्ट्रोन का पथ होगा : 

(अ) परवलयाकार
(ब) दीर्घवृत्ताकार
(स) वृत्ताकार
(द) सरल रेखा
उत्तर-- वृत्ताकार

प्र-7 क्षैतिज दिशा में v वेग से चलता हुआ एक इलैक्ट्रोन ऐसे स्थान में प्रवेश करता है जहां एक समान चुम्बकीय क्षेत्र ऊर्ध्वाधर दिशा में है। तो इस स्थान में इलैक्ट्रोन का पथ होगा :

(अ) क्षैतिज तल में एक वृत्त

(ब) ऊर्ध्वाधर तल में एक वृत्त

(स) क्षैतिज से 45 डिग्री कोण पर एक सरल रेखा

(द) क्षैतिज तल में एक परवलय

उत्तर-- क्षैतिज तल में एक वृत्त

प्र-8 एक इलैक्ट्रोन एक समान चुम्बकीय क्षेत्र B में क्षेत्र के लम्बवत v वेग से गमन करता है। अचानक चुम्बकीय क्षेत्र घटकर B/2 रह जाता है। तो पथ की प्रारंभिक त्रिज्या r का मान अब हो जायेगा : 

(अ) घटकर r/2
(ब) बढ़कर 2r
(स) बढ़कर 4r
(द) घटकर r/4
उत्तर-- बढ़कर 2r

प्र-9 यदि आवेशित कण का वेग दोगुना और चुम्बकीय क्षेत्र का मान आधा कर दिया जाए तो आवेशित कण के मार्ग की त्रिज्या हो जायेगी : 

(अ) 8 गुणी
(ब) 2 गुणी
(स) 4 गुणी
(द) 3 गुणी
उत्तर-- 4 गुणी

प्र-10 एक आवेशित कण चुम्बकीय क्षेत्र में क्षेत्र की दिशा से 30 डिग्री कोण पर प्रवेश करता है। कण का पथ होगा :

(अ) वृत्ताकार
(ब) कुण्डलीनीवत
(स) दीर्घवृत्ताकार
(द) सरल रेखा
उत्तर-- कुण्डलीनीवत

प्र-11 दो समांतर तारों में यदि धारा एक ही दिशा में बह रही हो तो वे एक दूसरे को आकर्षित करते है। क्योंकि :

(अ) उनके बीच विभवान्तर होता है
(ब) उनके बीच अन्योन्य प्रेरकत्व होता है
(स) उनके बीच वैधुत बल कार्य करता है
(द) उनके बीच चुम्बकीय बल कार्य करता है
उत्तर-- उनके बीच चुम्बकीय बल कार्य करता है

प्र-12 किसी चुम्बकीय क्षेत्र की त्रिवता की दिशा होती है :

(अ) चुम्बकीय क्षेत्र में गतिमान आवेशित कण पर कार्य करने वाले बल की दिशा में
(ब) चुम्बकीय क्षेत्र में गतिमान आवेशित कण पर कार्य करने वाले बल के लम्बवत
(स) चुम्बकीय क्षेत्र में वह दिशा जिसके अनुदिश गतिमान आवेश पर कोई बल कार्य नहीं करता है
(द) इनमें से कोई नहीं
उत्तर-- चुम्बकीय क्षेत्र में वह दिशा जिसके अनुदिश गतिमान आवेश पर कोई बल कार्य नहीं करता है

प्र-13 जब किसी चुम्बकीय द्विध्रुव को एक समान चुम्बकीय क्षेत्र में रखा जाता है तो यह अनुभव करता है :

(अ) एक बल का परन्तु कोई बल-युग्म नहीं
(ब) एक बल-युग्म का परन्तु कोई बल नहीं
(स) एक बल और एक बल-युग्म का
(द) न बल और न बल-युग्म
उत्तर-- एक बल-युग्म का परन्तु कोई बल नहीं

प्र-14 चुम्बकीय आघूर्ण का मात्रक है :

(अ) न्यूटन/ऐम्पीयर मीटर
(ब) ऐम्पीयर मीटर वर्ग
(स) वेबर/मीटर वर्ग
(द) हेनरी
उत्तर-- (ब) ऐम्पीयर मीटर वर्ग

प्र-15 ध्रुव प्रबलता का मात्रक है :

(अ) ऐम्पीयर मीटर वर्ग
(ब) ऐम्पीयर मीटर
(स) ऐम्पीयर/मीटर
(द) ऐम्पीयर/मीटर वर्ग
उत्तर-- (ब) ऐम्पीयर-मीटर

प्र-16 चुम्बकीय याम्योत्तर और भौगोलिक याम्योत्तर के बीच के कोण को कहते है :

(अ) नति कोण
(ब) दिकपात कोण
(स) ध्रुवण कोण
(द) क्रान्तिक कोण
उत्तर-- (ब) दिकपात कोण

प्र-17 पृथ्वी के चुम्बकीय ध्रुवों पर नमन कोण (नति कोण) का मान है :

(अ) 45 
(ब) 30 
(स) 0 
(द) 90 
उत्तर-- (द) 90 

प्र-18 किसी स्थान पर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के क्षैतिज घटक और ऊर्ध्वाधर घटक बराबर है तो उस स्थान पर नति कोण क्या होगा :

(अ) 0
(ब) 45
(स) 60
(द) 90
उत्तर-- (ब) 45 

प्र-19 पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का ऊर्ध्वाधर घटक शून्य होता है :

(अ) चुम्बकीय ध्रुवों पर 
(ब) भौगोलिक ध्रुवों पर
(स) प्रत्येक स्थान पर
(द) चुम्बकीय निरक्ष पर 
उत्तर-- (द) चुम्बकीय निरक्ष पर 

प्र-20 पृथ्वीज्ञके चुम्बकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक शून्य होता है :

(अ) चुम्बकीय ध्रुवों पर
(ब) भौगोलिक ध्रुवों पर
(स) प्रत्येक स्थान पर
(द) चुम्बकिय निरक्ष पर
उत्तर-- (अ) चुम्बकीय ध्रुवों पर

प्र-21 दो चुम्बकीय बल रेखायें :

(अ) उदासीन बिन्दु पर एक दूसरे को काटती है
(ब) उत्तरी या दक्षिणी ध्रुव के निकट काटती है
(स) एक दूसरे को कभी नहीं काटती
(द) चुम्भक के मध्य में काटती है
उत्तर-- (स) एक दूसरे को कभी नहीं काटती

प्र-22 लौह चुम्बकीय पदार्थों के लिए आपेक्षिक चुम्बकशीलता होती है :

(अ) <1
(ब) =1
(स) >1
(द) >>1
उत्तर-- (द) >>1

प्र-23 अनुचुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकशीलता का मान :

(अ) एक से कम 
(ब) कम लेकिन एक से अधिक
(स) एक
(द) एक से बहुत अधिक
उत्तर-- (ब) कम लेकिन एक से अधिक

प्र-24 प्रतिचुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकशीलता :

(अ) एक से बहुत अधिक
(ब) एक 
(स) एक से कम 
(द) एक से थोडा अधिक
उत्तर-- (स) एक से कम

प्र-25 डोमेन किस पदार्थ से बनते है :

(अ) प्रतिचुम्बकीय
(ब) लौह चुम्बकीय
(स) अनुचुम्बकीय
(द) इनमें से सभी में
उत्तर-- (ब) लौह चुम्बकीय

प्र-26 विधुत चुम्बक बनाने के लिए सबसे उचित धातु है :

(अ) नर्म लौहा
(ब) स्टील
(स) ताॅबा
(द) निकेल
उत्तर-- (अ) नर्म लौहा

प्र-27 वह ताप जिससें नीचें चुम्बकीय पदार्थ लौह चुम्बकीय और उससे ऊपरज्ञताप पर अनुचुम्बकीय होता है :

(अ) उत्क्रमण ताप
(ब) केल्विन ताप
(स) क्यूरी ताप
(द) उदासीन ताप
उत्तर-- (स) क्यूरी ताप

प्र-28 उदासीन बिन्दुओं पर :

(अ) B>H
(ब) B<H
(स) B=H
(द) B=0
उत्तर-- (स) B=H

प्र-29 चुम्बकीय पारगम्यता का एस आई प्रणाली में मात्रक क्या होता है ?

न्यूटन/ऐम्पीयर वर्ग

प्र-30 किस भौतिक राशि का मात्रक न्यूटन/ऐम्पीयर-मीटर होता है ?

चुम्बकीय क्षेत्र का

प्र-31 चुम्बकीय क्षेत्र के मात्रक न्यूटन/ऐम्पीयर मीटर को बताने वाला मूल सूत्र लिखिए।

F = BiL
B = F/iL   न्यूटन/ऐम्पीयर मीटर

प्र-32 सदिश रूप में लाॅरेंज बल का सूत्र लिखिए।

F = q ( v × B ) 
इस सूत्र में v हमेशा पहले लिखेगें और B को बाद में क्योंकि सदिश में कभी भी (v×B) और (B×v) बराबर नहीं होते इसलिए (v×B) वाला ही सही हल माना जाएगा।
Er. Chand सितंबर 06, 2021
Read more ...

चुंबकीय वाहक बल क्या है


 चुम्बकत्व वाहक बल को अंग्रेजी में magnetive motive force कहते है। यह एक ऐसा बल होता है जो चुम्बकीय परिपथ में फ्लक्स को बनाने के लिए फ्लक्स की मदद करता है, ऐसे बल को चुम्बकत्व वाहक बल कहते है। चुम्बकत्व वाहक बल को शाॅर्ट रूप में mmf से व्यक्त किया जाता है। यहां पर चुंबकीय वाहक बल का मात्रक को भी बताएंगे इसका मात्रक एम्पीयर टर्न होता है।इसके मात्रक को NI से व्यक्त किया जाता है।

किसी भी चुम्बकीय काॅयल में चुम्बकत्व वाहक बल उस काॅयल में बहनें वाली विधुत धारा (I) और उस काॅयल पर लपेटे गये तारों की संख्या (N) के गुणनफल के बराबर होता है।

               mmf = N×I

N = काॅयल पर लपेटे गये तारों की संख्या

I = काॅयल में बहनें वाली विधुत धारा

दोस्तों उम्मीद करता हूं कि आप सब को चुम्बकत्व वाहक बल के बारे में अच्छे से जानकारी प्राप्त हो गई होगी। इस पोस्ट में मैंने आपको चुम्बकत्व वाहक बल की परिभाषा के बारे में, इसके मात्रक के बारे में और ये चुम्बकीय परिपथ में उत्पन्न कैसे होता है इन सब के बारे में ऊपर बताया है अगर आपको पोस्ट अच्छी लगी है तो कमेंट करके जरूर बताइए।

Er. Chand सितंबर 02, 2021
Read more ...