चुंबकत्व क्या होता है
आज से लगभग 470 साल पहले एशिया माइनर में मैग्नेशिया नामक स्थान पर एक गहरे भूरे व काले रंग का पत्थर पाया गया था, जिसमें लौहे के छोटे-छोटे टुकड़ों को अपनी ओर आकर्षित करने का गुण था। मैग्नेशिया में पाये जाने के कारण इसका नाम मैग्नेटाइट रखा गया। इसी नाम से आधुनिक शब्द मैग्नेट की यानी चुंबक की उत्पत्ति हुई। यह पत्थर लौहे खा आक्साइड होता है, जिसका सूत्र Fe3O4 है। चुंबकत्व क्या होता है- मैग्नेटाइट के इस गुण को जिसके कारण यह लौहे के छोटे-छोटे टुकड़ों को अपनी ओर आकर्षित करता है, चुंबकत्व कहते है।
प्राकृतिक रूप में पाये जाने के कारण मैग्नेटाइट के टुकड़ों को, प्राकृतिक चुंबक कहते है। यदि किसी प्राकृतिक चुंबक को उसके गुरुत्व केन्द्र से बांधकर लटका दिया जाए, तो वह हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में ही ठहरता है। इस चुंबक के अन्दर चुंबकत्व बहुत कम होता है। इसलिए यह लौहे के टुकड़ों को अपनी ओर कम आकर्षित करती है। इन्हें प्रायोगिक कार्यो के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इसके लिए कुछ धातुओं जैसे, लौहा, फौलाद, निकिल और एलनिको जैसी मिश्र धातु से बनायें गए शक्तिशाली चुंबक प्रयोग में लायी जाती है। इस तरह की चुंबक को कृत्रिम चुंबक कहते है। आवश्यकता के अनुसार इन चुंबकों को किसी भी आकार में बनाया जा सकता है। जैसे, दण्ड चुंबक, नाल चुंबक, चुंबकीय सुई जैसी आकृतियों में ढाला जा सकता है। जिन पदार्थों में कृत्रिम रूप से चुंबकत्व ऊत्पन्न किया जा सकता है, उन्हें चुंबकीय पदार्थ कहते है।
चुंबकत्व के गुण (properties of a magnet)
• चुंबक चुम्बकीय पदार्थों को अपनी ओर खिंचता है-- जब कभी किसी दण्ड चुंबक को किसी चुम्बकीय पदार्थ के बुरादे या छीलन में डाला जाता है तो वे इस पर चिपक जाते है। चिपके हुए बुरादे की मात्रा चुंबक के सिरों पर अधिकतम और चुंबक के बीच वाले हिस्से पर कम होती है। इससे यह पता लगता है कि चुंबक के किनारों के आस पास चुंबकत्व सबसे अधिक होता है और बीच वाले हिस्से में चुंबकत्व सबसे कम होता है। चुंबक के दोनों किनारों को ध्रुव कहते है।
• स्वतन्त्रतापूर्वक लटका हुआ चुंबक सदैव उत्तर-दक्षिण दिशा में ठहरता है
यदि किसी चुंबक को एक धागे से बांधकर इस प्रकार लटकाया जाए कि वह एक क्षैतिज तल में स्वतन्त्रतापूर्वक घूम सकें। तो यह चुंबक हमेशा उत्तर-दक्षिण दिशा में ही ठहरता है। यदि हम इसको इसकी सन्तुलन की अवस्था से थोडा घुमा दे तब भी यह वापस उसी दिशा में आ जाता है। तो इस चुंबक का जो किनारा उत्तर दिशा की ओर होता है, उसे उत्तरी ध्रुव और जो किनारा दक्षिण दिशा में ठहरता है, उसे दक्षिणी ध्रुव कहते है।इन ध्रुवों को N और S से व्यक्त किया जाता है।
• चुंबक चुम्बकीय पदार्थों में प्रेरण द्वारा चुंबकत्व ऊत्पन्न कर देता है-
यदि किसी शक्ति शाली चुंबक का कोई ध्रुव नर्म लौहे की छड़ के पास लाया जाता है तो वह छड़ खुद एक चुंबक बन जाती है। इस घटना को चुंबकीय प्रेरण कहते हैं। और छड़ के द्वारा चुंबकत्व प्राप्त करने की क्रिया, चुंबकन कहलाती है। छड़ के उस सिरें पर जो चुंबक के ध्रुव के समीप होता है, विजातीय ध्रुव बनता है, दूसरे सिरें पर सजातीय ध्रुव बनता है।
• दो चुंबकों के सजातीय ध्रुवों में परस्पर प्रतिकर्षण और विजातीय ध्रुवों में परस्पर आकर्षण होता है-
यदि हम किसी स्वतन्त्रतापूर्वक लटके चुंबक से उत्तरी ध्रुव के पास एक अन्य चुंबक का उत्तरी ध्रुव लाते हैं तो हम देखते है कि लटका हुआ चुंबक दूसरे चुंबक से दूर भागता है और यदि हम इस चुंबक के उत्तरी ध्रुव के पास, दूसरी चुंबक का दक्षिणी ध्रुव लाते है, तो हम देखते है कि लककी हुई चुंबक दूसरी चुंबक के नजदीक आती है। तो इससे हमें यह पता चलता है कि एक जैसे ध्रुव एक दूसरे को प्रतिकर्षित करते है और अलग-अलग ध्रुव एक दूसरे को आकर्षित करते है।
धारावाही परिनलिका का चुंबकीय व्यवहार
परिनलिका विधुतरोधी तार की बनी एक एक बेलनाकार कुण्डली होती है जिसका व्यास उसकी लंबाई की अपेक्षा बहुत छोटा होता है। प्रायौगिक रूप में इसे कार्ड बोर्ड या मोटे कागज की कम व्यास की लम्बी खोखली नली के ऊपर ताॅबे के विधुतरोधी तार के बहुत से फेरे पास पास लपेटकर बनाया जाता है। इस परिनलिका में किसी बाहरी स्त्रोत द्वारा विधुत धारा प्रवाहित करने पर इसके चारों ओर, अन्दर ओर बाहर के स्थान में चुंबकीय क्षेत्र ऊत्पन्न हो जाता है। जिससे यह एक दण्ड चुंबक की तरह व्यवहार करने लगती है।
यहां पर हमने जाना है कि किसी चुंबक का चुंबकत्व क्या होता है और इसके गुण क्या क्या होते है और एक धारावाही परिनलिका में चुंबकीय क्षेत्र कैसे बनता है। इन सब के बारे में हमने इस पोस्ट में जाना है पोस्ट को पढ़ने के बाद अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर दिजियेगा।



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