Auto transformer in hindi : आटो ट्रांसफॉर्मर क्या होता है

आटो ट्रांसफॉर्मर क्या होता है

इस ट्रांसफॉर्मर में एक वाइंडिंग का प्रयोग किया जाता है। इसलिए इसे एक वाइंडिंग ट्रांसफॉर्मर भी कहते हैं जिसमें केवल एक ही वाइंडिंग होती है । जो हाई वोल्टेज और लाॅ वोल्टेज की तरह काम करती है इस ट्रांसफॉर्मर का उपयोग उन स्थानों पर किया जाता है जहां ट्रांसफॉर्मेशन रेशों ( k ) का मान एक (1) के बहुत नजदीक होती है क्योंकि जब k का मान 1 के बहुत नजदीक होगा तब इस ट्रांसफॉर्मर में काॅपर की आवश्यकता डबल वाइंडिंग ट्रांसफॉर्मर की तुलना में बहुत कम होगी । इसलिए इस ट्रांसफॉर्मर को काॅपर सेविगं के लिए उपयोग किया जाता हैं । 
इस ट्रांसफॉर्मर में एक ही वाइंडिंग प्राइमरी और सेकेंडरी वाइंडिंग का काम करती है जो कि डबल वाइंडिंग ट्रांसफॉर्मर की तरह ही कोर पर लपेटी जाती हैं । 
डबल वाइंडिंग ट्रांसफॉर्मर में प्रयोग होने वाली काॅपर का भार प्राइमरी और सेकेंडरी में बहने वाली धारा और उसके फेरों पर निर्भर करता हैं ।
ठीक इसी प्रकार ऑटो ट्रांसफॉर्मर में आवश्यक काॅपर का भार AC और BC भाग में बहने वाली धारा और इन भाग के फेरों पर निर्भर करता है ।             
          WAC = I ( N1 - N2 )
          WBC = N2 ( I2 - I1 ) 


Wa =  ऑटो ट्रांसफॉर्मर का वजन
W2 =  डबल वाइंडिंग ट्रांसफॉर्मर का वजन
माना k = .9 या वोल्टेज के मान से बहुत अधिक बदलाव नहीं होता है तब यदि हम तुलना करें तब डबल वाइंडिंग ट्रांसफॉर्मर की तुलना में ऑटो ट्रांसफॉर्मर में आवश्यक काॅपर का मान .1 गुना डबल वाइंडिंग ट्रांसफॉर्मर के वजन के बराबर होता है।

ऑटो ट्रांसफॉर्मर का उपयोग

ऑटो ट्रांसफॉर्मर का बहुत सी जगहों पर किया जाता है
(1) 3-फेज इंडक्शन मोटर के स्टार्टर के रूप में
(2) बूस्टर के रूप में
(3) इंडक्शन टाइप भट्टियों में वोल्टेज कंट्रोल के लिए
(4) लैंब में प्रेक्टिकल कार्यो के लिए


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