थ्री फेज ट्रांसफार्मर क्या होता है? : थ्री फेज ट्रांसफार्मर का निर्माण कैसे किया जाता है?

  थ्री फेज ट्रांसफार्मर क्या होता है


थ्री फेज ट्रांसफॉर्मर कई प्रकार के होते है इन्हें कनेक्शन के आधार पर कई भागों में बांटा गया है जैसे थ्री फेज स्टार स्टार कनेक्शन ट्रांसफॉर्मर, स्टार डेल्टा ट्रांसफॉर्मर, डेल्टा स्टार ट्रांसफॉर्मर, डेल्टा डेल्टा ट्रांसफॉर्मर इस प्रकार थ्री फेज ट्रांसफॉर्मर कनेक्शन के आधार पर चार भागों में बांटा गया है आज इन्ही चार प्रकार के थ्री फेज ट्रांसफार्मर इन हिंदी के बारे में हम नीचे बिस्तार से पढ़ेंगे। सबसे पहले हम स्टार स्टार कनेक्शन ट्रांसफॉर्मर के बारे में बात करेंगे।

Star star connection Transformer

इस कनेक्शन में transformer की प्राइमरी और सेकेंडरी दोनों वाइंडिंग star में जुड़ी होती है । इस कनेक्शन का उपयोग उन स्थानों पर करतें हैं जहां high voltage rating की आवश्यकता होती है क्योंकि प्रति फेज वोल्टेज का मान VL/√3 होता है।

यह कनेक्शन small rating, high voltage के लिए उपयोग किये जाते हैं । 
Star star connection kya hota hai



              Voltage ratio

             Current ratio

चूंकि एक फेज के एक्रोस वोल्टेज का मान
 होता हैं ।
इसलिए वाइंडिंग के लिए आवश्यक इंसुलेशन का मान delta delta के कंपेरिजन में काफी कम होता हैं ।

डेल्टा डेल्टा कनैक्शन ट्रांसफॉर्मर

इस कनैक्शन में ट्रांसफॉर्मर की दोनों वाइंडिंग प्राइमरी और सेकेंडरी डेल्टा कनैक्शन में जुड़ी होती है। इस डेल्टा डेल्टा कनैक्शन का प्रयोग हम वहां करते है जिस ट्रांसफॉर्मर में अधिक धारा और कम वोल्टेज की आवश्यकता होती है। इस कनैक्शन में यदि किसी एक फेज में फाल्ट आ जाये तो फाल्ट आने के बाद भी इस कनैक्शन में सप्लाई चालू रहती है। क्योंकि इस समय ट्रांसफॉर्मर ओपन डेल्टख के रूप में काम करता है। यही इस डेल्टा डेल्टा कनैक्शन की खास बात है कि एक फेज में फाल्ट आने के बाद भी सप्लाई चालू रहती है।

स्टार डेल्टा कनैक्शन ट्रांसफॉर्मर 

स्टार डेल्टा कनैक्शन का प्रयोग उन स्थानों पर करतें है जहां पर हमे वोल्टेज को कम करना होता है। इस कनैक्शन में हम प्राइमरी वाइंडिंग को स्टार में कनेक्ट करते है और सेकेंडरी वाइंडिंग को डेल्टा में कनैक्ट किया जाता है। इस स्टार डेल्टा कनैक्शन का प्रयोग हम ट्रांसमिशन लाइन के एंड में करते है। इस कनैक्शन में हमे प्राइमरी और सेकेंडरी वाइंडिंग के बीच 30 डिग्री का फेज डिफरेंस प्राप्त होता है। 

डेल्टा स्टार कनैक्शन ट्रांसफॉर्मर 

डेल्टा स्टार कनैक्शन का प्रयोग हम उन स्थानों पर करतें है जहां पर हमे वोल्टेज को बढाना होता है। इस कनैक्शन में ट्रांसफॉर्मर की प्राइमरी वाइंडिंग को डेल्टा में कनैक्ट किया जाता है और ट्रांसफॉर्मर की सेकेंडरी वाइंडिंग को स्टार में कनैक्ट किया जाता है। इस डेल्टा स्टार कनैक्शन का प्रयोग ट्रांसमिशन लाइन के स्टार्टिगं में किया जाता है। 

V-V कनैक्शन ट्रांसफॉर्मर 

V-V कनैक्शन को ओपन डेल्टा कनैक्शन भी कहते है। यदि डेल्टा डेल्टा कनैक्शन में कोई एक फेज खराब हो जाये या ओपन हो जाये तब भी सप्लाई दो फेज के द्वारा चालू रहती है। तो इसी कनैक्शन को हम v-v कनैक्शन कहते है। 
यदि हम 3 सिंगल फेज ट्रांसफॉर्मर को डेल्टा में जुड़ा हुआ मानते है और उनमें से किसी एक ट्रांसफॉर्मर की वाइंडिंग को हटा दें। तब भी सप्लाई परिपथ पूरा होने के कारण चालू रहती है। लेकिन इस कनैक्शन में परिपथ में कुछ बदलाव आ जाते है।
हर एक फेज में बहने वाली धारा, फेज धारा नहीं रहती है वह लाइन धारा हो जाती है। यानि के धारा √3 गुना बढ़ जाती है।
ओर ट्रांसफॉर्मर बैंक की रेटिंग कम हो जाती है। वह 57.7 प्रतिशत रह जाती है।

स्कोट कनैक्शन (Scott Connection) 

इस कनैक्शन में दो अलग-अलग ट्रांसफॉर्मर का प्रयोग किया जाता है। जिन्हें हम मेन ट्रांसफॉर्मर और टीज़र (teasure) ट्रांसफॉर्मर कहते है। टीजर ट्रांसफॉर्मर को हम मेन ट्रांसफॉर्मर के दोनों वाइंडिंग के बीच में जोड़ा जाता है। टीजर ट्रांसफॉर्मर की वाइंडिंग में टर्न की संख्या मेन ट्रांसफॉर्मर की वाइंडिंग के टोटल टर्न की संख्या के √3/2 गुना होती है।

यहां पर हमने थ्री फेज ट्रांसफॉर्मर के कई प्रकार के बारे में जाना है आप सभी को अच्छे से समझ में भी आ गया होगा। दोस्तों अगर आपके मन में अभी भी कोइ थ्री फेज ट्रांसफार्मर इन हिंदी से जुड़ा कोई सवाल है तो आप हमें कमेंट करके बता सकते है हम आपके सवाल का हल जरूर निकालेंगे। 

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