इलेक्ट्रिक वेल्डिंग क्या है
वेल्डन शब्द का मतलब किन्हीं दो लौहे के टुकड़ों को साथ साथ रखकर उन्हें उनके गलन बिन्दु तक गर्म करके जोड़ने से है। इलेक्ट्रिक वेल्डिंग क्या हैं? में दो वस्तुओं को आपस में जोड़ने के लिए आवश्यक तापमान विधुत धारा के द्वारा उत्पन्न किया जाता है। बोल्ट के जोड़ों की अपेक्षा वेल्डन जोड़ अधिक मजबूत होते है, इसलिए आजकल इंजिनियरी में वैधुत वैल्डिंग का अधिक प्रयोग किया जा रहा है आज के इस समय में कई प्रकार की वैल्डन का उपयोग जैसे प्रतिरोध वैल्डिंग और आर्क वैल्डिंग का बहुत ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है यहां पर वैल्डिंग और वेल्डन के प्रकार के बारे में अच्छे से पढ़ेंगे।
resistance welding in hindi
प्रतिरोध वैल्डिंग (Resistance welding)
जैसा कि इस वेल्डन के नाम से ही पता चल रहा है कि यहां पर वैल्डिंग के लिए आवश्यक ताप, उच्च प्रतिरोध और उच्च धारा के द्वारा विकसित किया जाता है। इस प्रकार प्रतिरोध वेल्डन में उच्च धारा को, जोड़े जाने वाले भागों से प्रवाहित किया जाता है जोड़ और धातु का प्रतिरोध, गलन और वैल्डिंग प्रचालन के लिए पर्याप्त ताप उत्पन्न करता है।
वैधुत वेल्डन में 2 से 10 वोल्ट तक की वोल्टेज आवश्यक होती है जिसका मान वेल्डन क्षेत्र और वेल्डन किए जाने वाली धातु के टुकड़ों की मोटाई पर निर्भर करता है। प्रतिरोध वैल्डिंग के लिए प्रत्यावर्ती धारा बहुत उपयुक्त होती है क्योंकि ट्रांसफॉर्मर द्वारि आवश्यक धारा और वोल्टेज प्राप्त की जा सकती है। प्रतिरोध इलेक्ट्रिक वेल्डिंग भी कई प्रकार की होती है जिनका वर्णन नीचे किया गया है।
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(1) बट या टक्कर वेल्डन (Butt welding)
बट वेल्डन के भी दो प्रकार होते है, जिसमें पहली स्थुल टक्कर वेल्डन और दूसरा चमक टक्कर वेल्डन है
• स्थूल टक्कर वेल्डन इस विधि में जोड़ें जाने वाले भागों को के सिरों को आपस में जोड़ा जाता है। इसमें धातु के दो टुकड़ों के जोड़े जाने वाले सिरों को आमने-सामने मिलाकर वैल्डिंग मशींन से क्लैम्प इलैक्ट्रोडों में कस दिया जाता है। एक इलैक्ट्रोड फिक्स होता है और दूसरा मूवेबल होता है। इलैक्ट्रोड में विधुत धारा प्रवाहित करने पर धातु सिरों का तापमान गलन बिन्दु तक पहुंच जाता है, इस स्थिति में चल इलैक्ट्रोड की ओर से यांत्रिक दाब दिया जाता है, जिससे थोड़े समय में ही दोनों सिरे आपस में वेल्ड हो जाते है।
चमक टक्कर वेल्डन- इस वैल्डिंग में धारा प्रवाहित करने के बाद दोनों धातु सिरों को धीरे धीरे नजदीक लाया जाता है। जैसे ही धातु के सिरे एक दूसरे के पास पहुंचते है तो दोनों सिरों के बीच एक आर्क उत्पन्न होता है, जिसके कारण सिरों का तापमान गलन बिन्दु तक पहुंच जाता है तो चल इलैक्ट्रोड की ओर से यांत्रिक दाब दिया जाता है और सप्लाई को बन्द कर दिया जाता है इस प्रकार दोनों धातु आपस में जुड़ जाती है।
spot welding in hindi
(2) बिन्दु वेल्डन (spot welding)
धातुओं की चादरों को जोड़ने के लिए स्पाॅट या बिन्दु वेल्डन का प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार के जोड़ केवल यांत्रिक मजबूती प्रदान करते है यह पानी वाले स्थानों या वायु रोधक नहीं होते है। इस इलेक्ट्रिक वेल्डिंग में धातु चादरों को एक के ऊपर एक, इलैक्ट्रोड के मध्य रखा जाता है और धारा के प्रवाह के बाद गति करने वाली इलैक्ट्रोड के द्वारा यांत्रिक दाब दिया जाता है, जिससे दोनों धातु चादरों के मध्य धारा प्रवाह और सम्पर्क प्रतिरोध के कारण अधिक ताप ऊत्पन्न होता है, जिससे दोनों चादरे सम्पर्क बिन्दु पर पिघल कर जुड़ जाती है।
आर्क वैल्डिंग (Arc welding)
आर्क वैल्डिंग में यांत्रिक दाब की जरूरत नहीं होती है, इसमें इलैक्ट्रोड और धातु के बीच में आर्क उत्पन्न किया जाता है, जिससे आर्क की गर्मी से धातु पीघल जाती है। आर्क वेल्डन में 3500 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान की आवश्यकता होती है इस ताप पर धातुओं के गलन में किसी यांत्रिक दाब की आवश्यकता नहीं रहती। आर्क ऋणात्मक प्रतिरोध रिजन रखता है या यह कह सकते है कि धारा बढ़ने से आर्क प्रतिरोध घटता है और प्रतिरोध घटने से धारा बढ़ती है। जिससे आर्क एक समान नहीं रहता है।
आर्क वैल्डिंग में प्रत्यावर्ती धारा और दिष्ट धारा दोनों का प्रयोग किया जा सकता है। आर्क ऊत्पन्न करने के लिए प्रत्यावर्ती धारा सप्लाई के 70 से 💯 वोल्ट तक और डी सी सप्लाई के 50 से 60 वोल्ट तक तथा धारा 30 से 600 एम्पियर तक हो सकती है। एक बार आर्क उत्पन्न हो जाने पर उसको बनाएं रखने के लिए 20 से 30 वोल्ट काफी होते है।
इस अध्याय में हमने इलेक्ट्रिक वेल्डिंग क्या है और यह कितने प्रकार की होती है, कहां कहां इसको प्रयोग किया जाता है और आज के समय में इसका उपयोग कहां किया जा रहा है यह जाना है पोस्ट में अगर कोई गलती या कुछ छूट गया है तो आप कमेंट करके जरूर बताइए जिससे कि हम अपनी गलती को सुधार सकें।



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