इलैक्ट्रिक फाल्ट क्या होता है : इलैक्ट्रिक फाल्ट कितने प्रकार के होते है

                   फाल्ट क्या होता है

फाल्ट को शुद्ध हिन्दी में प्रदोष कहा जाता है।फाल्ट का मतलब एक विधुत उपकरण के विधुत परिपथ में आये उस दोष से है जिसके कारण धारा का प्रवाह अपने निशचित मार्ग से हट जाना होता हैं ।
किसी विधुत परिपथ में यदि तार या तारो का समूह टूटकर अलग हो जाता हैं या भूमि से टकरा जाये या तारो का समूह आपस में जुडकर short circuit हो जाने के कारण परिपथ अनियमित अवस्था में आ जाये तो उस परिपथ में प्रदोष ( fault ) आ जाता हैं ।


वैधुत प्रदोष (fault ) के प्रकार

वैधुत प्रणाली में दोष दो प्रकार के होते हैं

(1) आंतरिक वैधुत प्रदोष ( Internal Electrical Fault ) 

ऐसा fault जो वैधुत मशीनों के अन्दर लगें उपकरणों, मशीनों आदि के आंतरिक भागों में उत्पन्न होता हैं उसे आंतरिक वैधुत प्रदोष कहते है । ये प्रदोष सामान्यतः दिखाई नही देते हैं ।

(2) बाह्मा वैधुत प्रदोष ( External Electrical Fault ) 

इस प्रकार के प्रदोष वैधुत प्रणाली में प्रयुक्त होने वाले उपकरणों एवं मशीनों के बाह्मा भागों में आते हैं इन्हें बाहरी प्रदोष कहते है । ये प्रदोष आंखों से दिखाई देते हैं । 


वैधुत प्रणाली के प्रदोषो का वर्गिकरण

वैधुत शक्ति प्रणाली में आने वाले वैधुत प्रदोषो को निम्न प्रकार से विभाजित किया गया है 

                              Faults

(1) वैधुत प्रदोष।                      
स्थाई प्रदोष (permanent fault)
अस्थाई प्रदोष (Temporary fault)

(2) यांत्रिक प्रदोष ।

स्थाई प्रदोष (permanent fault )


ऐसा प्रदोष जो वैधुत शक्ति प्रणाली में लम्बे समय तक रहता है और उसे हटाना पड़ता है । ऐसे प्रदोष को स्थाई प्रदोष कहते हैं ।
स्थाई प्रदोष दो प्रकार के होते हैं ।

सममित प्रदोष (symmetrical fault )
असममित प्रदोष ( Asymmetrical fault )

सममित प्रदोष (symmetrical fault )


इस प्रदोष के कारण सभी तारो में धारा का मान एक जैसा रहता है । उसे सममित प्रदोष कहते हैं ।
इसमें निम्न प्रदोष आते हैं ।

(1) त्रिकला लघु पथ प्रदोष (3-phase short circuit fault )
(2) त्रिकला खुला पथ प्रदोष (3-phase open circuit fault )
(3) त्रिकला भू-दोष ( 3-phase earth fault )
(4) त्रिकला कोरोना क्षरण प्रदोष ( 3-phase corona leakage fault )
(5) त्रिकला अतिभार प्रदोष (3-phase over load fault)
 

असममित प्रदोष ( Asymmetrical fault )


ऐसे प्रदोष जिसमें वैधुत शक्ति प्रणाली के सभी तारो में धारा का मान अलग अलग होता है । उसे असममित प्रदोष कहते है । इसमें निम्न प्रदोष आते हैं ।

(1) एकल कला भू दोष ( 1-phase earth fault )
(2) एकल कला खुला पथ प्रदोष ( 1-phase open circuit fault )
(3) द्विकला भू दोष ( 2-phase earth fault )
(4) द्विकला खुला पथ प्रदोष ( 2-phase open circuit fault )
(5) द्विकला लघु पथ प्रदोष ( 2-phase short circuit fault )
(6) त्रिकला असंतुलित अतिभार प्रदोष ( 3-phase unbalance over load fault )

अस्थाई प्रदोष ( Temporary fault ) 

ऐसा प्रदोष जो तारो में कुछ समय तक रहता है अर्थात कुछ समय बाद अपने आप ही हट जाता हैं । ऐसे प्रदोष को अस्थाई प्रदोष कहते हैं । जैसे कि आंधी के समय हवा के कारण तार आपस में टकराते हैं । और बाद में खुद ही हट जाते है ।


प्रदोष के स्त्रोत ( Sources of Faults )


जब किसी विधुत शक्ति प्रणाली में विधुत प्रदोष आता है तो उसकी चर राशियों जैसे कि विधुत दाब, धारा प्रवाह आदि में अनियमितता आ जाती हैं । जिससे विधुत प्रदोष होने पर पता चलता है । विधुत प्रदोष होने के कई कारण होते हैं । परन्तु विधुत प्रदोषो के स्त्रोतो को विभिन्न प्रकारों में विभाजित किया जा सकता हैं ।

(1) यांत्रिक क्षति ( mechanical Injury )

विधुत संचरण तारो में यह प्रदोष तेज चलने वाली हवाओं या वृक्षों या दिवारो के उन तारों पर गिरने से उनमें होने वाली क्षति के कारण हो सकता है । इस कारण संवाहक के टूटने या विसंवाहक ( insulator ) के कार्य नहीं करने से हों सकता हैं । इस कारण परिपथ जल सकते हैं ।


कोई टिप्पणी नहीं: