इलैक्ट्रिकल इंसुलेटर कितने प्रकार के होते हैं? : types of insulator in hindi

          इलैक्ट्रिकल इंसुलेटर क्या होता है

इंसुलेटर ओवर हैड डिस्ट्रिब्यूशन और ट्रांसमिशन लाइन का वह कम्पोनेंट्स है जो लाइन कंडक्टर और पोल के बीच विधुतरोधक का काम करता है। और लाइन कंडक्टर और ग्राउंड के बीच बहने वाली लिकेज धारा को प्रोटेक्ट करता है एक अच्छे इंसुलेटर में निम्न गुण होना बहुत जरूरी होता है।

• उच्च यांत्रिक ऊर्जा

• उच्च इंसुलेशन प्रतिरोध

• उच्च डाइलैक्टिक ऊर्जा

• विधुतरोधी पदार्थ

 इलैक्ट्रिकल इंसुलेटर कितने प्रकार के होते हैं? (types of insulator) 

ओवरहैड डिस्ट्रिब्यूशन लाइन और ट्रांसमिशन में कई प्रकार के इंसुलेटर का उपयोग वोल्टेज रेटिंग के आधार पर अलग अलग इंसुलेटर का उपयोग किया जाता है। जैसे पीन टाइप इंसुलेटर, सस्पेनशन इंसुलेटर और शैकल इंसुलेटर और भी कई प्रकार के इंसुलेटर होते है जिनका प्रयोग हम ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइन में करते है अब हम इन सब इंसुलेटर को एक एक करके विस्तार से निचे पढ़ेंगे।

        types of insulator in hindi


पीन इंसुलेटर (pin insulator) 

जैसा इसके नाम से पता चलता है कि इस इंसुलेटर को पोल के क्रास आर्म पर पीन की सहायता से बांधा जाता है इस इंसुलेटर के ऊपरी भाग में एक ग्रो बना रहता है जिसमें से एक चालक गुजराता है और इस चालक को एक वायर के द्वारा बांध दिया जाता है ताकि कंडक्टर ग्रो में फिक्स रहें।
इस इंसुलेटर को 33 के वी तक की लाइन में प्रयोग किया जाता है। इससे अधिक वोल्टेज पर प्रयोग करने के लिए इसका साइज बढ़ाना पड़ता है जिससे ये काफी भारी हो जाते है जो कि फायदेमंद नहीं है। इंसुलेटर के लिए यह जरूरी है कि वह मकैनिकल और इलैक्ट्रिकल भार सहन कर सके।

सशपेंशन टाइप इंसुलेटर (suspension type insulator)

33 के वी वोल्टेज लाइन से अधिक रेटिंग वाली लाइन के लिए पिन इंसुलेटर लाभदायक नहीं होते है 33 के वी वोल्टेज लाइन से अधिक रेटिंग पर सशपेंशन इंसुलेटर का उपयोग किया जाता है। सशपेंशन इंसुलेटर में पोर्शिलिन की डिस्क को सीरीज में कनैक्ट किया जाता है और एक स्ट्रींग बकी सेप में बनाया जाता है। इस स्ट्रिंग का एक एंड क्रास आर्म पर और दुसरा एंड कंडक्टर से कनैक्ट होता है। 
इसमें सामान्य एक डिस्क 11 के वी की वोल्टेज के लिए डिजाइन किया जाता है। डिस्क को सीरीज में जोड़ने से इसे हाई वोल्टेज पर आसानी से प्रयोग किया जा सकता है। 
सशपेंशन टाइप इंसुलेटर सामान्य ट्रांसमिशन लाइन में प्रयोग किये जाते है क्योंकि स्टील टाॅवर का ग्राउंड एरिया 12 मीटर से अधिक होता है। सशपेंशन टाइप इंसुलेटर को ऊर्ध्वाधर प्रयोग किया जाता है।

स्ट्रैन इंसुलेटर (strain insulator) 


जिन स्थानों पर लाइन का खत्म हो रही हो या लाइन को सार्प क्रव दिया जाना हो तब लाइन पर पड़ने वाला खिंचाव अधिक बढ़ जाता है इस खिंचाव को फलैक्सिबिलिटी के द्वारा ही कम किया जा सकता है इसलिए ऐसे स्थानों पर स्ट्रेन इंसुलेटर का उपयोग किया जाता है। 
लो वोल्टेज लाइन खिचांव के लिए शैकल इंसुलेटर का प्रयोग किया जाता है जबकि हाई वोल्टेज लाइन में खिंचाव के लिए सशपेंशन इंसुलेटर को ही क्षैतिज दिशा में प्रयोग करके स्ट्रेन इंसुलेटर बनाये जातें है। यदि खिंचाव काफी अधिक है तो तब दो स्ट्रींग को समांतर में प्रयोग करके स्ट्रेन इंसुलेटर बनाये जातें है।

सशपेंशन इंसुलेटर की स्ट्रींग इफीसियंसी (string efficiency of suspension insulator)

सशपेंशन इंसुलेटर में बहुत सी डिस्क सीरीज में जुड़ी रहती है और डिस्क का पोर्शिलीन वाला भाग दो धातु लिंक के द्वारा जुड़ा रहता है जिसके कारण सीरीज कैपेसिटेंस ऊत्पन्न होता है। ठीक इसी प्रकार डिस्क के मेंटल लिंक और पोल के बीच भी एक कैपेसिटेंस ऊत्पन्न होता है जिसे शंट कैपेसिटेंस कहते है।



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