आर्मेचर रियक्शन ( Armeture Reaction )
जब आर्मेचर पर भार (load) को कनैक्ट किया जाता है तब आर्मेचर चालक में धारा बहने लगती है जिसके कारण आर्मेचर अपना फ्लक्स उत्पन्न करता हैं। इस आर्मेचर फ्लक्स के कारण मेन फ्लक्स पर जो प्रभाव पड़ता है उसे आर्मेचर रियक्शन कहते हैं।
आर्मेचर फ्लक्स के प्रभाव के कारण मेन फ्लक्स डिस्टोर्टेड और डीमेगनेटाइज हों जाता हैं।
डी सी मशीन में किसी पोल पर चुम्बकीय क्षेत्र का बढ़ जाना और किसी पोल पर चुम्बकीय क्षेत्र का घट जाना आर्मेचर रियक्शन के कारण होता हैं ।
डी सी मशीन में आर्मेचर रियेक्शन या आर्मेचर फ्लक्स क्राॅस मैगनेटाइजीगं होते है जिसके कारण सारा चुम्बकीय क्षेत्र (resultant field) distorted यानी एक पोल टिप पर चुम्बकीय क्षेत्र ज्यादा हो जाता है और एक पोल टिप पर चुम्बकीय क्षेत्र कम हो जाता है। जिस पोल टिप पर चुम्बकीय क्षेत्र ज्यादा हो जाता है उसे strengthening effect कहते है और जिस पोल टिप पर चुम्बकीय क्षेत्र कम हो जाता है उसे weakning effect कहते हैं ।
जेनरेटर पर आर्मेचर रियक्शन के प्रभाव से ट्रेलिंग पोल टिप पर चुम्बकीय क्षेत्र ज्यादा हो जाता हैं और लिडिगं पोल टिप पर चुम्बकीय क्षेत्र कम हो जाता हैं ।
मोटर पर आर्मेचर रियक्शन के प्रभाव के कारण ट्रेलिग पोल टिप पर चुम्बकीय क्षेत्र का मान कम हो जाता है और लिडिगं पोल टिप पर चुम्बकीय क्षेत्र का मान ज्यादा हो जाता है ।
आर्मेचर रियक्शन का प्रभाव
आर्मेचर रियक्शन के कारण डी सी मशीन के कई भागों पर इसका प्रभाव पड़ता हैं।
(1) आयरन लोस (iron loss) बढ़ जाते हैं
आर्मेचर रियक्शन के कारण एक पोल टिप पर चुम्बकीय क्षेत्र का मान ज्यादा हो जाता है जिससे कोर saturated (छक जाती है इसका मतलब यह है कि हम एक गिलास ले और उसे पानी से पुरा भर दें अब अगर हम इस गिलास में पानी डालेंगे तो वह पानी बाहर निकल जायेगा और खराब हो जायेगा यानी के गिलास saturate हों चुका इसी प्रकार कोर भी saturate हों जाती है और अब इसमें जितना भी चुम्बकीय क्षेत्र बनेगा वह लोस हों जायेगा । ) इस कारण कोर लोस काफी अधिक हो जाते हैं ।
(2) कम्यूटेशन (commutation) के समय चिंगारी उत्पन्न होना
आर्मेचर रियक्शन के कारण MNA, GNA से दूर हों जाती है और जिस काॅयल में कम्यूटेशन होगा उसमें उत्पन्न विधुत वाहक बल (emf) का मान शून्य नहीं होगा जिसके कारण कम्यूटेशन के समय चिंगारी (sparking) उत्पन्न होगी।
(3) रिंग फायर का उत्पन्न होना
फ्लक्स डेंसिटी में डिस्टोर्शन के कारण यदि किन्हीं दो कम्यूटेटर सिगमेंट के बीच वोल्टेज अधिक हो जाये तो माइका इंसुलेशन का ब्रेक डाउन हो जाता है जिससे काॅयल शाॅर्ट सर्किट हो जाती है। जिससे कम्यूटेटर में स्पार्किगं होने के कारण रिंग फायर उत्पन्न हो जाता है।
(4) फिल्ड वाइंडिंग की लागत बढ़ जाती है।
डि मैगनेटाइजिगं प्रभाव के कारण रिजल्टेंट फ्लक्स कम हो जाता है जिससे उत्पन्न होने वाला विधुत वाहक बल कम हो जाता है। इस विधुत वाहक बल का मान बढ़ाने के लिए हमें फिल्ड वाइंडिंग के चालकों का घुमाव बढ़ाना पड़ता है जिससे फिल्ड वाइंडिंग की लागत बढ़ जाती है।
आर्मेचर रियक्शन को कम करने के तरीके
(1) हाई रिलेक्टेसं की पोल टिप का प्रयोग करके
पोल टिप का रिलेक्टेसं बढ़ाने से आर्मेचर में क्राॅस फ्लक्स कम हो जाता है जिससे सारे चुम्बकीय क्षेत्र (resultant magnetic field) में डिस्टोर्शन कम हो जाता है। इसमें पोल की कोर पर आयताकार होल बनाये जातें है ऐसा करने से आर्मेचर फ्लक्स के पाथ का रिलेक्टेंस बढ जाता है और आर्मेचर फ्लक्स का प्रभाव कम हो जाता है।
(2) इन्टर पोल का प्रयोग करके
आर्मेचर रियक्शन के कारण चुम्बकीय क्षेत्र distorted हों जाता है जिससे इन्टर पोल एक्सिस पर सारा चुम्बकीय क्षेत्र शून्य नहीं होता है। इन्टर पोल एक्सिस पर चुम्बकीय क्षेत्र शून्य करने के लिए इन्टर पोल बनाये जातें है जिनके द्वारा उत्पन्न होने वाला फ्लक्स GNA पर सारे चुम्बकीय क्षेत्र को शून्य कर देता हैं ।इन्टर पोल वाइंडिंग को आर्मेचर के साथ श्रेणी में जोड़ा जाता हैं।
(3) कोम्पनसेटिगं वाइंडिंग (compernsating winding) का उपयोग करके।
कोम्पनसेटिगं वाइंडिंग को पोल फेस में स्लोट कट करके उसमें डाला जाता है और इस वाइंडिंग को आर्मेचर के सीरीज में कनैक्ट किया जाता है। इस वाइंडिंग में धारा की दिशा उसके सामने वाले आर्मेचर चालक में बहने वाली धारा की दिशा के विपरित रखीं जाती है। कोंपनसेटिगं वाइंडिंग एक फ्लक्स उत्पन्न करती है जो कि आर्मेचर फ्लक्स के बराबर और उसके विपरित होता है जिससे आर्मेचर रियक्शन का प्रभाव पूरा खत्म हो जाता हैं।
ब्रस शिफ्ट करने का प्रभाव
यदि हम ब्रसेस को जेनरेटर के घुमने की दिशा में शिफ्ट कर दे तो बिना सैचुरेशन के ही डि मैगनेटाइजिगं प्रभाव होगा। और यदि ब्रसेस को मोटर के घुमने की दिशा में शिफ्ट कर दे तो मैगनेटाइजिगं प्रभाव के कारण रिजल्टएंट फिल्ड बढ़ जाता है जिससे उसमें उत्पन्न होने वाला विधुत वाहक बल भी बढ़ जाता है।
कम्यूटेशन का प्रभाव
जब कोई काॅयल या चालक एक पोल के प्रभाव से निकलकर दुसरे पोल के प्रभाव में पहुंचता है तब उस काॅयल या चालक में बहने वाली धारा अपने पूरे मान के लिए वापस (reverse) होती है। इस घटना को ही कम्यूटेशन कहते है।
कम्यूटेशन के दौरान काॅयल, ब्रस के द्वारा शाॅर्ट सर्किटेड होती है और इस शाॅर्ट सर्किट समय में ही धारा अपना पूरा मान परिवर्तित करती है।
शाॅर्ट सर्किट समय को कम्यूटेशन समय कहते है। यदि धारा कम्यूटेशन समय में अपने पूरे मान को वापस नहीं हो पाती है तो यह धारा स्पार्किगं के रूप में जम्प करती है। जिससे ब्रस और कम्यूटेटर के बीच स्पार्किगं दिखाई देती है।
गुड़ कम्यूटेशन--गुड कम्यूटेशन का मतलब यह होता है कि धारा अपने पूरे मान को वापस हों जाती है। और ब्रस और कम्यूटेटर के बीच कोई स्पार्किगं नहीं होती है।इसे आदर्श कम्यूटेशन भी कहते है।
पुवर (weak) कम्यूटेशन___पुवर कम्यूटेशन का मतलब यह होता है कि शाॅर्ट सर्किट समय में धारा का पूर्ण रूप से अपने मान को वापस ना हो पाना है जिससे कारण से ब्रस और कम्यूटेटर के बीच स्पार्किगं होती है।
डिल्य कम्यूटेशन दूर करने की विधियां
कम्यूटेशन को इम्प्रूव करने के काफी सारी विधियां है।
(1) वोल्टेज कम्यूटेशन
हमेशा जी एन ए (GNA) पर काॅयल में उत्पन्न विधुत वाहक बल शून्य होना चाहिए। इसलिए इंटर पोल पर अलग से विधुत वाहक बल उत्पन्न कराया जाता है। जिससे एक रोटेशनल विधुत वाहक बल उत्पन्न होगा जो रियक्टैंस वोल्टेज के प्रभाव को कम कर देता है। इस प्रकार कम्यूटेशन में लगने वाला समय कम हो जाता है।
(2) प्रतिरोध कम्यूटेशन
इस विधि में हम काॅयल या चालक का प्रतिरोध बढ़ा देते है जिससे काॅयल या चालक की इंडक्टिव प्रोपर्टी कम हो जाती है जिसके कारण काॅयल के रियक्टेंस वोल्टेज का प्रभाव भी कम हो जाता है इस प्रकार इस विधि के द्वारा भी कम्यूटेशन में लगने वाला समय कम हो जाता है।
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