प्रतिरोध क्या है
किसी पदार्थ का वह गुण जो उसमें बहने वाली धारा के रास्ते में रुकावट पैदा करता है उसे उस पदार्थ का प्रतिरोध (Resistance) कहते हैं। हर पदार्थ का प्रतिरोध अलग अलग होता है। जो उस पदार्थ की प्रकृति, लंबाई, क्षेत्रफल ओर पदार्थ के तापमान पर निर्भर करता है।
प्रतिरोध का S.I मात्रक ओम (ohm) होता है।
प्रतिरोध एक अदिश राशि होती है।
प्रतिरोध को अंग्रेजी अक्षर R से प्रदर्शित करते है।
किसी चालक के सिरों पर लगने वाला विभवांतर V और उस चालक में बहने वाली विधुत धारा के अनुपात को उस चालक का प्रतिरोध कहते है।
रेजिस्टेंस का फार्मूला
R = V / I
चालक के प्रतिरोध पर तापमान का प्रभाव
चालक का तापमान बढ़ाने पर बन्द (bond) टूटते हैं । जिसके कारण फ्री इलैक्ट्रोन की संख्या बढ़ जाती है और ये इलैक्ट्रोन एक दूसरे से टकराने लगते हैं । जिससे इनके पाथ में रुकावट आ जाती हैं । और चालक का प्रतिरोध बढ़ जाता हैं ।
चालक का प्रतिरोध तापमान बढ़ाने पर बढ़ता है और अर्धचालक का प्रतिरोध तापमान बढ़ाने पर कुछ का घटता है और कुछ अर्धचालक का प्रतिरोध बढ़ता हैं ।
अर्धचालक दो प्रकार के होते हैं
(1) अन्त: द्रविय अर्धचालक (सीलिकन, जर्मेनियम)
अन्त:द्रविय अर्धचालक का तापमान बढ़ाने पर इनका प्रतिरोध कम होता हैं क्योंकि इन अर्धचालको में पहले से फ्री इलैक्ट्रोन नहीं होते हैं ज़ीरो केल्विन या एब्सोल्यूट जीरो पर ये insulator की तरह व्यवहार करते हैं क्योंकि इनके इलैक्ट्रोन बन्द (bond) बनाने में वयस्थ रहते हैं । लेकिन जब हम इनका तापमान बढ़ते हैं तो ये इलैक्ट्रोन फ्री हो जाते हैं और इधर उधर घूमने लगते हैं इस कारण इनका प्रतिरोध कम हो जाता हैं ।
(2) ब्राहा: द्रविय अर्धचालक (n- प्रकार, p-प्रकार)
ब्राहा: द्रविय अर्धचालक का तापमान बढ़ाने पर इनका प्रतिरोध बढ़ जाता है क्योंकि इन अर्धचालको में पहले से फ्री इलैक्ट्रोन होते हैं और जब हम इनका तापमान बढ़ाते हैं तो ये फ्री इलैक्ट्रोन एक दूसरे से टकराने लगते हैं जिससे इनके पाथ में रुकावट आ जाती है और इनका प्रतिरोध बढ़ जाता हैं ।
प्रतिरोध का श्रेणी क्रम में संयोजन
जब हम दो या दो से अधिक प्रतिरोधो का एक एक सिरा आपस में जोड़ते हैं और दुसरा सिरा किसी दूसरे प्रतिरोध के साथ जोड़ते हैं तो इस संयोजन को प्रतिरोध का श्रेणी क्रम संयोजन कहते हैं ।

R = R1 + R2
(1) श्रेणी संयोजन में सप्लाई वोल्टेज सभी प्रतिरोध में बट (divide) जाती हैं
(2) जिस प्रतिरोध का मान सबसे अधिक होगा । उस प्रतिरोध के एक्रोस वोल्टेज सबसे अधिक होगी ।
(3) यदि R मान के n प्रतिरोध श्रेणी में जुड़े हों तो समतुल्य प्रतिरोध
समतुल्य प्रतिरोध (Req) = nR
होगा
(4) श्रेणी संयोजन में धारा सभी प्रतिरोध में एक समान (बराबर) रहती हैं ।
प्रतिरोध का समान्तर क्रम में संयोजन
यदि दो या दो से अधिक प्रतिरोधो के सिरे आपस में जुड़े हों तो ऐसे संयोजन को प्रतिरोधो का समान्तर क्रम संयोजन कहा जाता हैं । इस संयोजन में सभी प्रतिरोध में वोल्टेज समान रहती है और धारा सभी प्रतिरोध में अलग अलग होती हैं ।
R = R1 × R2 / R1 + R2
यदि R मान के n प्रतिरोध समान्तर क्रम में जुड़े हैं तो उनका समतुल्य प्रतिरोध
समतुल्य प्रतिरोध (Req) = R / n
प्रतिरोधकता (Resistivity)
यदि किसी पदार्थ की लंबाई एक मीटर और क्षेत्रफल एक मीटर वर्ग हैं तो उस पदार्थ का प्रतिरोध उसकी प्रतिरोधकता कहलाती है। इसे विशिष्ट प्रतिरोध भी कहते हैं।
(1) प्रतिरोधकता लंबाई और क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करती हैं।
(2) प्रतिरोधकता पदार्थ की प्रकृति ओर तापमान पर निर्भर करती हैं।
प्रतिरोध की निर्भरता
(1) किसी भी पदार्थ का प्रतिरोध उसकी लंबाई के बढ़ने पर बढ़ता है। यानि प्रतिरोध पदार्थ की लंबाई के समानुपाती होता है।
(2) पदार्थ का क्षेत्रफल बढ़ने पर उसका प्रतिरोध कम हो जाता है। यानि प्रतिरोध पदार्थ के क्षेत्रफल के व्यूतक्रमानुपाती होता है।
(3) प्रतिरोध पदार्थ की प्रकृति पर भी निर्भर करता है।
(4) प्रतिरोध पदार्थ का तापमान बढ़ने पर बढ़ जाता है।
तार को खिंचने पर उसके प्रतिरोध पर क्या प्रभाव पड़ता है
जब किसी तार को खिंचकर उसकी लंबाई को n गुना बढ़ा दिया जाता है तो उसका क्षेत्रफल घटकर 1/n हो जाता है और तार का प्रतिरोध ( n square) हो जाता है।
तो चलिए एक उदाहरण के द्वारा इसको समझते है।
मान लीजिए किसी तार की लंबाई (l) है, उसके अनुप्रस्त काट का क्षेत्रफल (A) है और उस तार का प्रतिरोध (R) है। अब इसकी लंबाई को खींचकर n गुना बढा दिया जाता है जिससे इसकी नई लंबाई (l' = nl) हो जाती है और इसका नया क्षेत्रफल (A' = A/n) हो जाता है तो इसके नये प्रतिरोध का मान
resistance meaning in hindi
resistance को को हिंदी में प्रतिरोध कहा जाता है यानी इसका मतलब होता है विरोध करना। मान लीजिए किसी वायर से करंट बह रही है तो उस तार कुछ न कुछ प्रतिरोध होगा जो इसके अन्दर से गुजरने वाली विधुत धारा का विरोध करेगा। असल में एक रेजिस्टेंस का काम धारा का appose करना ही होता है।
इस जानकारी के अन्दर हमने प्रतिरोध को जाना है और कहा कहा इसका उपयोग हो रहा है, किन किन चीजों का इस प्रभाव पड़ता है और किन चीजों पर यह निर्भर करता है। तो इस सब का ज्ञान हमने ग्रहण किया है। अगर आपको इस पोस्ट में कुछ भी अच्छा लगा हो हमें कमेंट करके जरूर बताइए।
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