अल्टरनेटर या सिन्क्रोनस मशींन क्या है
अल्टरनेटर एक ऐसी रोटेटिंग मशींन होती है जो प्रत्यावर्ती धारा वोल्टेज बनाती है। इसके द्वारा यांत्रिक ऊर्जा को प्रत्यावर्ती विधुत ऊर्जा में बदला जाता है। इसलिए इसे प्रत्यावर्ती धारा जेनरेटर भी कहा जाता है। अल्टरनेटर को शुरुआत में एक प्राइम मूवर के द्वारा घुमाया जाता है। ये प्राइम मूवर एक इंजन या टरबाइन होता है।
जब अल्टरनेटर को इंजन से चलाया जाता है तब इसे इंजन अल्टरनेटर सेट, डीजल अल्टरनेटर सेट और डीजल जेनरेटर सेट के नाम से जाना जाता है। और जब अल्टरनेटर को टरबाइन से चलाया जाता है तब इसे टर्बो अल्टरनेटर, वाटर टर्बो अल्टरनेटर, स्टीम टर्बो अल्टरनेटर और गैस टर्बो अल्टरनेटर के नाम से जाना जाता है। थर्मल पॉवर प्लांट और गैस पाॅवर प्लांट में इन्ही अल्टरनेटर के द्वारा बिजली बनाईं जाती है।
आज कल लगभग सभी बिजली घरों पर इन्ही अल्टरनेटरों का प्रयोग करके प्रत्यावर्ती धारा वोल्टेज को बनाया जा रहा है।
अल्टरनेटर का कार्य सिद्धान्त
अल्टरनेटर का कार्य सिद्धान्त डी सी जेनरेटर के समान ही होता है क्योंकि डी सी जेनरेटर के आर्मेचर में उत्पन्न होने वाला गतिकिय विधुत वाहक बल भी एक ए सी वोल्टेज होता है। जिसको कम्यूटेटर के द्वारा डी सी वोल्टेज में बदल दिया जाता है। यदि डी सी जेनरेटर में कम्यूटेटर के स्थान पर स्लिप रिगं लगा दें तो ब्रुशों के आर पार ए सी वोल्टेज प्राप्त होगीं
अल्टरनेटर में डी सी जेनरेटर की अपेक्षा अलग से तीन परिवर्तन किये जाते है।
• इसमें आर्मेचर को स्टेटर पर लगाया जाता है।
• और फिल्ड को रोटर पर स्थापित किया जाता है।
• अल्टरनेटर सेल्फ एक्साइटेड नहीं होते है इसे एक्साइटेड करने के लिए कम वोल्ट की डी सी सप्लाई देने के लिए रोटर की साफ्ट पर एक डी सी शंट जेनरेटर को स्थापित किया जाता है।
रोटर को डी सी सप्लाई देकर प्राइम मूवर की सहायता से घुमाया जाता है जिससे रोटर के अन्दर फ्लक्स बनता है इस फ्लक्स का रोटर के चालकों द्वारा छेदन किया जाता है फ्लक्स का छेदन होने से स्टेटर की आर्मेचर वाइंडिंग में एक गतिकीय विधुत वाहक बल उत्पन्न होता है। यही अल्टरनेटर के द्वारा उत्पन्न होने वाली ए सी वोल्टेज होती है।
अल्टरनेटर इस प्रत्यावर्ती विधुत वाहक बल को कई सारे अंगों की मदद से उत्पन्न कर पाता है अगर ये अंग न हो तो अल्टरनेटर के लिए बिजली बनाना मुमकिन न होता। तो इन मुख्य अंगों के बारे में हम नीचे बिस्तार से पढ़ेंगे।
स्थाता(Stator)
स्टेटर ढलवां लोहे का बना हुआ मजबूत व टिकाऊ ढाॅचा होता है जिसके नीचे के भाग में जमीन पर रखने के लिए पैर लगें होते है। इस ढाॅचें के अन्दर खाॅचों को बनाकर आर्मेचर वाइंडिंग को डाला जाता है इसके ऊपर शीतलन वाहिनीयाॅ बनाई जाती है जो आर्मेचर वाइंडिंग की गर्मी को कम करती है। ये ढाॅचा मशींन को रोककर रखता है और इस पर लगे अंगों को सुरक्षा प्रदान करता है।
डी सी मशींन की तरह अल्टरनेटर में भी स्टेटर होता है किसी भी मशींन में रुकें हुए अंग को स्टेटर कहते है। अल्टरनेटर में स्टेटर की परिभाषा ऐसे दें सकते है। "अल्टरनेटर के स्थिर अंगों के समूह को स्टेटर कहते है।" सभी अल्टरनेटर में आर्मेचर को स्टेटर पर स्थापित किया जाता है। इसलिए अल्टरनेटर में आर्मेचर वाइंडिंग को स्टेटर वाइंडिंग,आर्मेचर कोर को स्टेटर कोर और आर्मेचर स्लोट को स्टेटर स्लोट कहते है। स्टेटर पर ये अंग लगें होते है।
• लिफ्टिगं बोल्ट (lifting bolt)
• पट्ट (name plate)
• टर्मीनल बोक्स (tarminal box)
• पाद (foot)
• फिक्सिगं होल (fixing holl)
• इनर फिक्सिंग स्लोट (inner fixing slot)
• इनर फिक्सिंग टीथ (inner fixing teeth)
• आर्मेचर कोर (armeture core)
• आउटर फिक्सिंग स्लोट (outer fixing slot)
• आउटर फिक्सिंग टीथ (outer fixing teeth)
• आर्मेचर कोर स्लोट (armeture core slot)
आर्मेचर कोर (Armeture core)
आर्मेचर कोर को स्टेटर कोर भी कहते है क्योंकि आर्मेचर कोर को स्टेटर फ्रेम में स्लोट कट करके डाला जाता है। इन कोर को सिलिकॉन स्टील की पटलित पत्तियों से बनाया जाता है। इन पत्तियों को विधुतरोधी के पतले लेप से वार्निश किया जाता है। अल्टरनेटर के अन्दर ये कोर वृत्ताकार बनाई जाती है।
स्थाता खाॅचें (Stator slot)
इंजीनियरिंग भाषा में खाॅचों को स्लोट कहते है जिस स्थान पर वाइंडिंग को लगाया जाता है उस जगह को खाॅचें कहते है। खाॅचों को स्टेटर फ्रेम में बनाया जाता है अल्टरनेटर में की प्रकार के खाॅचों का प्रयोग किया जाता है जिनके बारे में हम नीचे पढ़ेंगे।
खुलें खाॅचें (open slot)
इन खाॅचो में वाइंडिंग को आसानी से डाला और निकाला जा सकता है इनमें वाइंडिंग की मरम्मत करने में भी कम समय लगता है। इसलिए इन खाॅचों का उपयोग सबसे अधिक किया जाता है।
इन खाॅचो की सबसे बड़ी कमी यह होती है इनके कारण वायु अंतराल में चुम्बकीय फ्लक्स गुच्छों के रूप में फैलता है। जिससे प्रेरित विधुत वाहक बल में अधिक ऊर्मिकायें पैदा हो जाती है। इसलिए इन खाॅचों का उपयोग केवल स्टेटर पर किया जाता है।
अर्ध खुलें खाॅचें (semi open slot)
इन खाॅचो में काॅयल को डालना और निकालना मुश्किल होता है इनमें काॅयल को एक साथ स्थापित नहीं करते है। बल्की इनमें चालकों को एक एक करके फैसाना पढ़ता है। खुलें खाॅचों की अपेक्षा इन खाॅचो का उपयोग कम किया जाता है। इन खाॅचो को केवल उच्च गति वाले घूर्णक पर ही बनाया जाता है।
बन्द खाॅचें (close slot)
इन खाॅचो में वाइंडिंग को भरना बहुत मुश्किल होता है इनमें वाइंडिंग को भरने में बहुत समय लगता है और वाइंडिंग भरने का खर्चा भी अधिक आता है। इसलिए इन खाॅचों का उपयोग बहुत कम किया जाता है। लेकिन इन खाॅचो में एक अच्छीं बात होती है ये वायु अंतराल में चुम्बकीय फ्लक्स को फैलने नहीं देते है।
स्थाता कुण्डलन (Stator winding)
अल्टरनेटर में स्थाता कुण्डलन को आर्मेचर वाइंडिंग भी कहा जाता है क्योंकि अल्टरनेटर में आर्मेचर वाइंडिंग को स्थाता पर ही खाॅचें बनाकर उनके अन्दर भरा जाता है। वाइंडिंग को बनाने के लिए ताॅबें के तार का उपयोग किया जाता है।
थ्री फेज सिंक्रोनस मशींन में तीन आर्मेचर वाइंडिंग का प्रयोग किया जाता है। इन तीनों वाइंडिंग को एक दूसरे से 120 डिग्री के कोण पर व्यवस्थित किया जाता है।
उच्च क्षमता वाले अल्टरनेटर की स्थाता कुण्डलन में खोखलें चालकों की काॅयल बनाई जाती है। क्योंकि अल्टरनेटर के लगातार चलने के कारण अल्टरनेटर की गर्मी बहुत बढ़ जाती है। इसकी गर्मी को कम करने के लिए खोखलें चालकों में विधुतरोधी शीतलन पदार्थ का प्रवाह कराया जाता है जिससे चालकों की गर्मी कम हो जाती है।
चालकों की गर्मी को कम करने के लिए विधुतरोधी शीतलन पदार्थ आसुत जल या हाइड्रोजन गैस का प्रयोग किया जाता है।
घूर्णक (Rotor)
अल्टरनेटर के घूमने वाले अंग को घूर्णक कहते है। घूर्णक अल्टरनेटर का एक मुख्य अंग होता है। अल्टरनेटर को घूर्णक की साफ्ट के द्वारा ही इनपूट प्राइम मूवर की सहायता से दी जाती है। अल्टरनेटर में अधिकतर दो प्रकार के घूर्णकों का उपयोग किया जाता है। जिनके बारे में नीचे बिस्तार से बताया गया है।
समुन्नत ध्रुव प्रारूपी घूर्णक (Salient pole type Rotor)
समुन्नत ध्रुव प्रारूपी घूर्णक को उभरा ध्रुव घूर्णक भी कहते है क्योंकि इसके जो पोल होते है वो आगे की और उभरे हुए होतें है। इस घूर्णक पर अधिक पोल बनें होते है जिनकी संख्या 12 से 120 के बीच में रहती है। इसलिए इस घूर्णक की गति कम होती है इस घूर्णक की अधिकतम गति 500 आर पी एम होती है इसलिए इसे कम गति वाला घूर्णक भी कहते है।
इस घूर्णक की चौड़ाई अधिक (3m से 6m) होती है और इसकी लंबाई कम (0.5 से 1.5m) होती है। इसलिए ये वजन में बहुत ज्यादा भारी होतें है और चौड़ाई में अधिक स्थान घेरते है। इस घूर्णक को ऊर्ध्वाधर यानी इसकी साफ्ट ऊर्ध्वाधर दिशा में होती है। ये घूर्णक चलते हुए अधिक आवाज ऊत्पन्न करता है।
इस घूर्णक की गति कम होने के कारण इनका उपयोग डीजल इंजन अल्टरनेटर और वाटर टर्बो अल्टरनेटर में किया जाता है।
चिकना बेलनाकार घूर्णक (Smooth cylindrical Rotor)
इस घूर्णक के पोल चिकने और बेलनाकार होते है इसलिए इसे चिकना बेलनाकार घूर्णक कहते है। इस घूर्णक पर बनाये गये पोल कम होते है जिनकी संख्या 2,4 या 6 रखीं जाती है। पोलो की संख्या कम होने के कारण इस घूर्णक की गति अधिक होती है। इस घूर्णक की न्यूनतम गति 1000 आर पी एम और अधिकतम गति 3000 आर पी एम होती है। इसलिए इस घूर्णक को उच्च गति वाला घूर्णक भी कहते है।
इस घूर्णक की चौड़ाई कम (0.5 से 1.5m) होती है और इसकी अक्षीय लंबाई अधिक (3 से 6m) होती है। इसलिए ये घूर्णक लंबाई में अधिक स्थान घेरनें वाले होते है। और ये चलने पर आवाज भी बहुत कम करते है। इस घूर्णक की गति अधिक होने के कारण इसका उपयोग स्टीम टर्बो अल्टरनेटर और गैस टर्बो अल्टरनेटर में किया जाता है।






कोई टिप्पणी नहीं: