विधुत टैरिफ क्या है : टैरिफ के प्रकार

 टैरिफ क्या होता है

सर्विस प्रोवाइडर कंज्यूमर से जिस रेट से चार्ज करते है उसे टैरिफ कहते है। टैरिफ को निर्धारित करने के निम्न फैक्टर होते है। जैसे पावर स्टेशन पर इलैक्ट्रिकल एनर्जी जैनरेशन पर होने वाले खर्च की सीमा, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन में लगाई गई किमत पर, आपरेशन और मेंटिनेंस में प्रयोग होने वाले उपकरणों के खर्च की सीमा पर इन्ही सभी फैक्टरों को ध्यान में रखते हुए टैरिफ निर्धारित किया जाता है। इस निर्धारण के आधार पर टैरिफ को कई भागों में बांटा गया है।

सिम्पल टैरिफ (simple tarrif)

जब खर्च की गई विधुत ऊर्जा को एक निश्चित दय से चार्ज किया जाता है तो उसे सिम्पल टैरिफ कहते है। खर्च की जाने वाली टोटल एनर्जी को एनर्जी मीटर की हेल्प से काउंट किया जाता है और कोंस्टेंट रेट की रिडिगं से गुणा करके टैरिफ बनाया जाता है। इस टैरिफ की सबसे बड़ी कमी यह है कि यह अलग-अलग प्रकार के कंज्यूमर से अलग-अलग चार्ज नहीं करता है और इसमें कोस्ट पर यूनिट भी अधिक पढ़ती है

फ्लैट रेट टैरिफ (Flat rate tarrif)

इस टैरिफ के द्वारा अलग-अलग कंज्यूमर क़ अलग-अलग पर यूनिट रेट से चार्ज किया जाता है। इस टैरिफ के द्वारा पहले कंज्यूमर को अलग-अलग कैटेगरी में बांंटा जाता है और फिर अलग-अलग रेट से चार्ज किया जाता है।
जैसे कम भार वाले कंज्यूमर के लिए अलग रेट रखा जाता है और अधिक भार वाले कंज्यूमर के लिए अलग रेट रखा जाता है।
इस टैरिफ की सबसे बड़ी कमी यह है कि इसमें अलग-अलग भार के लिए अलग-अलग मीटर लगाने पड़ते है। और इसमें चार्ज करने की रेट टोटल इलैक्ट्रिकल यूनिट पर निर्भर नहीं करती है।

टू पार्ट टैरिफ (Two part tarrif) 

इस टैरिफ के द्वारा कंज्यूमर से अधिकतम मांग और खर्च की गई ऊर्जा के अनुसार चार्ज किया जाता है। इस टैरिफ को दो भागों में बांट दिया जाता है जिसमें एक फिक्स चार्ज और दुसरा रनिंग चार्ज होता है।

थ्री पार्ट टैरिफ (Three part tarrif) 

थ्री पार्ट टैरिफ टू पार्ट टैरिफ का ही ए मोडिफाई वर्जन है जिसमें अधिकतम मांग और खर्च यूनिट के साथ एक फिक्स चार्ज भी जोड़ दिया जाता है। यह फिक्स चार्ज सैकेंडरी डिस्ट्रिब्यूशन की मैंटिनेंस और लैबर कोस्ट के रूप में लिये जाते है।

अधिकतम मांग टैरिफ (maximum demand tarrif) 

यह टैरिफ भी टू पार्ट टैरिफ के समान होता है इसमें अन्तर सिर्फ इतना होता है कि इस टैरिफ में अधिकतम मांग को मैक्सिमम डिमांड इंडिकेटर की मदद से मापकर तब चार्ज किया जाता है। यह टैरिफ प्लान बड़े कंज्यूमर के लिए प्रयोग किया जाता है।

ब्लोक रेट टैरिफ (Block rate tarrif) 

ब्लोक रेट टैरिफ में टोटल यूनिट को अलग-अलग ब्लोक में बांटा जाता है और हर ब्लोक का चार्ज रेट अलग होता है। जैसे पहली 100 यूनिट का चार्ज रेट 2 रुपए/यूनिट और अगली 101 यूनिट से 300 यूनिट के चार्जिंग रेट 2.5 रुपए/यूनिट और 301 यूनिट से अधिक यूनिट के लिए चार्जिंग रेट 3 रुपए/यूनिट किये जाये तो तब यह टैरिफ प्लान ब्लोक रेट टैरिफ में आता है। यह प्लान इलैक्ट्रिकल एनर्जी सेविंग को प्रोत्साहित करता है।

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