स्टार्टर क्या है
स्टार्टर एक विधुत युक्ति होती है, जो मोटर के आरम्भिक समय में सप्लाई वोल्टेज को नियंत्रित करके, सभी प्रकार से सुरक्षा प्रदान करता है। स्टार्टर को हिन्दी में प्रवर्तक कहते है। स्टार्टर कई प्रकार के होते है, परन्तु इनका मूल सिद्धांत लगभग एक समान होता है। आधुनिक स्टार्टरों के साथ मोटर की सुरक्षा युक्तियों का उपयोग भी होता है। स्टार्टर क्या है भिन्न भिन्न क्षमता की इंडक्शन मोटरों को स्टार्ट करने के लिए प्रयुक्त स्टार्टर निम्न प्रकार के होते है।
• प्रत्यक्ष लाइन पर जोड़ने वाला स्टार्टर (direct online starter)
• तारा त्रभुज स्टार्टर (star delta starter)
• लाइन प्रतिरोध स्टार्टर (line resistance starter)
• लाइन प्रतिघात स्टार्टर (line reactance starter)
• स्वपरिणामित्र स्टार्टर (auto transformer starter)
• घूर्णक प्रतिरोध स्टार्टर (rotor resistance starter)
स्टार्टर का कार्य
स्टार्टर का सबसे मुख्य काम मोटर को जब स्टार्ट किया जाता है तो यह स्टार्टिगं के समय मोटर की वोल्टेज को नियंत्रित करता है या कम करता है और जब मोटर का घूर्णक घुमना शुरू कर देता है तब सप्लाई वोल्टेज को धीरे धीरे बढ़ाते हुए, अंत में मोटर को पूर्ण वोल्टेज प्रदान करता है। यह सभी स्टार्टरों का एक सामान्य सिद्धांत होता है।
स्टार्टिंग समय में मोटर द्वारा उच्च विधुत धारा लेने का कारण
मोटर को स्टार्ट करते समय, बिल्कुल शुरुआती समय में जब घूर्णक की गति शून्य होती है, तब घूर्णक का परिपथ लघुपथित होने के कारण, ट्रांसफॉर्मर की लघुपथित द्वितियक कुण्डली की तरह कार्य करता है। जिसके कारण घूर्णक अत्यधिक विधुत धारा लेता है। इसका एक कारण यह भी है कि जब मोटर को शुरुआत में स्टार्ट करते है तो सप्लाई वोल्टेज का विरोध करने के लिए विरोधी विधुत वाहक बल का मान शून्य होता है। जिसके कारण मोटर द्वारा पूर्ण वोल्टेज धारण की जाती है, इसलिए मोटर अत्यधिक विधुत धारा लेती है। बाद में जब मोटर घूमने लगती है, तब विरोधी विधुत वाहक बल उत्पन्न होता है, जो विधुत धारा को कम कर देता है।
स्टार्टर की आवश्यकता या जरूरत क्यो होती है।
थ्री फेज इंडक्शन मोटरें उच्च क्षमता की होती है, जो स्टार्टिंग के समय सप्लाई से अत्यधिक आरम्भिक धारा (पूर्ण भार धारा की 5 से 7 गुनी धारा) लेती है, जबकि इंडक्शन मोटर का आरंभिक बलाघूर्ण कम (पूर्ण भार बलाघूर्ण का 1.5 से 2.5 गुना) विकसित होता है। जिसकी वजह से फ्यूज के गलत निर्धारण पर मोटर की वाइंडिंग जलकर नष्ट हो सकती है। इसलिए इनमें स्टार्टर की आवश्यकता होती है।
• अत्यधिक विधुत धारा के कारण सप्लाई की वितरण प्रणाली में लाइन वोल्टतापात अधिक बढ़ जाता है, जिसके कारण सप्लाई प्रणाली का वोल्टेज रेगुलेशन प्रभावित होता है। इसलिए इन मोटर में स्टार्टर जरूरी है।
• वोल्टेज रेगुलेशन प्रभावित होने से वितरण प्रणाली से जुड़े हुए उपस्करों के प्रचालन पर अच्छा प्रभाव नहीं पड़ता है अर्थात् उपस्करों के कार्य करने की परर्फोमेंस खराब हो जाती है।
• वितरण प्रणाली की स्टेबलिटी भी डिस्टर्ब होती है इसलिए इंडक्शन मोटर को स्टार्ट करने के लिए स्टार्टर की आवश्यकता होती है। तो स्टार्टर क्या है हमने इस पोस्ट में यह जाना है उम्मीद है कि आपको भी अच्छे से समझ में आ गया होगा। अगर आपको पोस्ट अच्छी लगी है तो कमेंट करके जरूर बताइए।



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